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पटना के पारस हेल्थ ने बचाई रेल हादसे में घायल युवक की जान, जटिल न्यूरोसर्जरी से मिला नया जीवन

पटना के पारस हेल्थ अस्पताल में गंभीर रेल हादसे में घायल युवक की सफल न्यूरोसर्जरी कर डॉक्टरों ने उसकी जान बचाई। लंबे इलाज और फिजियोथेरेपी के बाद मरीज अब सामान्य जीवन जी रहा है।

बिहार न्यूज
तमिलनाडु के युवक को पटना के पारस हेल्थ में मिला नया जीवन
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: पटना के पारस हेल्थ अस्पताल ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक, त्वरित उपचार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमवर्क का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए एक गंभीर रेल हादसे में घायल युवक को नया जीवन दिया है। तमिलनाडु निवासी एक युवा इंजीनियर, जो एक निजी कंपनी के प्रोजेक्ट कार्य के सिलसिले में पटना आया था, भयावह ट्रेन दुर्घटना का शिकार हो गया था। लंबे और जटिल इलाज के बाद अब वह लगभग पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहा है।


आधुनिक चिकित्सा तकनीक, समय पर उपचार और डॉक्टरों की टीमवर्क का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए पारस हेल्थ के चिकित्सकों ने एक गंभीर रेल दुर्घटना में बुरी तरह घायल युवक की जान बचाकर उसे नया जीवन दिया। तमिलनाडु निवासी एक युवा इंजीनियर, जो एक निजी कंपनी के प्रोजेक्ट कार्य के सिलसिले में पटना आया था, भयावह रेल हादसे का शिकार हो गया था। जटिल न्यूरोसर्जरी और लंबे इलाज के बाद मरीज अब लगभग पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है। जानकारी के अनुसार युवक लोकल ट्रेन से यात्रा कर रहा था। यात्रा के दौरान वह ट्रेन के दरवाजे के पास खड़ा था, तभी चलती ट्रेन में रेलवे पोल से टकरा गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसके सिर का ऊपरी हिस्सा लगभग दो भागों में विभाजित हो गया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण वह तुरंत बेहोश हो गया।


अस्पताल पहुंचने तक दुर्घटना को लगभग 12 घंटे बीत चुके थे। मरीज अत्यधिक रक्तस्राव, हाइपोवोलेमिक शॉक, मेटाबोलिक एसिडोसिस और गहरे कोमा की स्थिति में था। इमरजेंसी विभागाध्यक्ष डॉ. चंदन किशोर व टीम ने तुरंत उपचार शुरू किया और मरीज को न्यूरो आईसीयू में भर्ती किया गया। वहां पूरी रात डॉ. शहजादा और क्रिटिकल केयर टीम ने मरीज को स्थिर करने के लिए लगातार प्रयास किया। मरीज को पर्याप्त मात्रा में रक्त और ब्लड प्रोडक्ट्स चढ़ाए गए तथा शॉक और एसिडोसिस को नियंत्रित किया गया।


अगली सुबह डॉ. नीरज झा की अगुआई में मरीज की आपातकालीन न्यूरोसर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान बाइफ्रंटल डीकंप्रेसिव क्रेनियेक्टॉमी, फ्रंटल कंट्यूजेक्टॉमी, क्षतिग्रस्त और मृत ब्रेन टिश्यू की सफाई तथा एंटीरियर क्रेनियल फोसा की मरम्मत की गई, ताकि भविष्य में सीएसएफ लीकेज जैसी जटिलताओं से बचा जा सके। इलाज के दौरान संक्रमण होने पर दूसरी सर्जरी भी करनी पड़ी। लंबे इलाज, नर्सिंग केयर और फिजियोथेरेपी के बाद मरीज अब लगभग पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है।


इस संबंध में वरिष्ठ न्यूरोसर्जन चीफ कंसल्टेंट डॉ. नीरज झा ने कहा कि “यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था। मरीज गंभीर अवस्था में हमारे पास लाया गया था, लेकिन समय पर रिससिटेशन, सटीक सर्जरी और पूरी टीम के समर्पण से हम उसकी जान बचाने में सफल रहे। ऐसे मामलों में एडवांस्ड ट्रॉमा केयर और टीमवर्क सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” न्यूरोसर्जरी टीम में डॉ. अम्बुज कुमार एंव डॉ. वीर अभिमन्यू पंडित ने भी योगदान किया।


वहीं पारस हेल्थ के जोनल डायरेक्टर  श्री अनिल कुमार  ने कहा कि “पारस हेल्थ में मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। यह सफलता हमारे डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, प्रशासनिक टीम और पैरामेडिकल कर्मियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। हम भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ लोगों की सेवा करते रहेंगे।”


पारस हेल्थ के बारे में जानें

पारस हेल्थ पटना ने 2013 में परिचालन शुरू किया। यह बिहार का पहला कॉर्पोरेट अस्पताल है जिसके पास परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा लाइसेंस प्राप्त कैंसर उपचार केंद्र है। जून 2024 में एक्सेस किए गए एनएबीएच पोर्टल के अनुसार, पारस हेल्थ, पटना 2016 में एनएबीएच मान्यता प्राप्त करने वाला बिहार का पहला अस्पताल था। इस अस्पताल की बेड क्षमता 400 से ज्यादा की है, जिसमें 80 आईसीयू बेड शामिल हैं साथ ही 2 LINAC मशीन एंव PET-CT की सुविधा भी उपलब्ध है।

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