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Bihar News : बिहार से बंगाल-झारखंड जाने से पहले पढ़ लें ये खबर, अचानक बंद हुए दो अहम पुल; 30 किलोमीटर दूरी बढ़ी

बिहार से झारखंड और पश्चिम बंगाल जाने वालों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। जमुई जिले में एनएच-333ए पर बने नरियाना और मांगोबंदर पुल को जर्जर हालत के कारण बंद कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को अब 30KM लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा।

Bihar News : बिहार से बंगाल-झारखंड जाने से पहले पढ़ लें ये खबर, अचानक बंद हुए दो अहम पुल; 30 किलोमीटर दूरी बढ़ी
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar News : बिहार से झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। जमुई जिले में एनएच-333ए पर बने दो महत्वपूर्ण पुलों को अचानक बंद कर दिया गया है। खैरा-सोनो मुख्य मार्ग पर स्थित नरियाना और मांगोबंदर पुल की हालत बेहद जर्जर पाए जाने के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई ने इस पर बड़े वाहनों की आवाजाही रोक दी है। पुलों के दोनों सिरों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है, जिससे अब इस रूट से गुजरने वाले लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।


दरअसल, यह दोनों पुल बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले अहम मार्ग पर स्थित हैं। रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन इसी रास्ते से गुजरते थे। लेकिन पुलों की हालत लगातार खराब होती जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक नरियाना पुल का एक पिलर धंस चुका है, जिसके कारण पुल का बीच वाला हिस्सा नीचे बैठ गया है। इतना ही नहीं, पुल का स्लैब दो हिस्सों में टूट चुका है और नीचे की प्लेट में बड़ी दरारें आ गई हैं। पुल के अंदर लगी सरिया तक बाहर दिखाई देने लगी है और सीमेंट भी झड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके थे कि जब भारी वाहन पुल से गुजरते थे तो तेज कंपन महसूस होता था। ऐसे में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता था।


इसी तरह मांगोबंदर पुल की स्थिति भी लंबे समय से खराब बनी हुई थी। पुल में कई साल पहले ही दरारें पड़ चुकी थीं और इसकी संरचना कमजोर हो गई थी। बताया जा रहा है कि करीब नौ साल पहले एनएचएआई की टीम ने निरीक्षण के दौरान पुल के गार्डर और स्लैब में खराबी मिलने की पुष्टि की थी। उस समय पुल के पुनर्निर्माण की बात कही गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका। अब दोनों पुलों की हालत और ज्यादा खतरनाक हो जाने के बाद विभाग को आखिरकार इन्हें बंद करने का फैसला लेना पड़ा।


हालांकि स्थानीय लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए बाइक और साइकिल सवारों के लिए पुल को आंशिक रूप से खुला रखा गया है। लेकिन बड़े वाहनों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार पर भी असर पड़ने लगा है। मालवाहक वाहनों को अब करीब 30 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ रही है।


एनएचएआई के सहायक अभियंता रामप्रवेश चौधरी ने बताया कि सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल यह कदम उठाया गया है। विभाग जल्द ही डाइवर्जन बनाने पर विचार कर रहा है ताकि लोगों को राहत मिल सके। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा वर्षों से ओवरलोडेड ट्रकों के लगातार दबाव ने पुलों को समय से पहले कमजोर कर दिया।


गौरतलब है कि नरियाना पुल का निर्माण वर्ष 2009 में शुरू हुआ था और 2011 में यह बनकर तैयार हुआ था। लेकिन कुछ ही वर्षों में इसकी हालत बिगड़ने लगी। अब दोनों पुलों के एक साथ बंद होने से इलाके की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। नदी पार के दर्जनों गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्कूल, अस्पताल और बाजार जाने वाले लोगों को अब लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।


स्थानीय लोगों ने सरकार और एनएचएआई से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने और नए पुल निर्माण की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह मार्ग बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है, इसलिए जल्द समाधान जरूरी है, वरना आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है।