Bihar Railway News : दिल्ली से बिहार आने वाले रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। आने वाले दिनों में संपूर्ण क्रांति, विक्रमशिला और हमसफर जैसी ट्रेनों को पटना जंक्शन पहुंचने में मालगाड़ियों की वजह से होने वाली देरी से राहत मिल सकती है। रेलवे ने पटना के आसपास ट्रेनों का दबाव कम करने के लिए एक नई रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। इससे मालगाड़ियों को पटना जंक्शन से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे दूसरे रास्ते से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगी।
दरअसल, पटना जंक्शन बिहार के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें आती-जाती हैं दिल्ली से हावड़ा जाने वाले मुख्य रेल मार्ग पर होने के कारण इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन लगातार होता रहता है। इसके अलावा, मालगाड़ियों की आवाजाही भी काफी अधिक है। ऐसे में कई बार यात्री ट्रेनों को पटना जंक्शन पहुंचने से पहले या दानापुर के आसपास इंतजार करना पड़ता है। इसका असर लंबी दूरी की ट्रेनों की समय-सारणी पर भी पड़ता है।
इस समस्या को दूर करने के लिए पूर्व मध्य रेलवे ने नेउरा-जटडुमरी नई रेल लाइन के 20 किलोमीटर लंबे हिस्से पर ट्रेन चलाने की मंजूरी मिलने की जानकारी दी है रेल सुरक्षा आयुक्त यानी सीआरएस ने इस रेलखंड का निरीक्षण करने और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद परिचालन की अनुमति दी है। इससे इस रेल लाइन को शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्रा के अनुसार, 8 अक्टूबर को इस रेलखंड का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान रेल लाइन पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाकर स्पीड ट्रायल भी किया गया। इस दौरान जरूरी सुरक्षा मानकों की जांच की गई। सभी निर्धारित मानकों के सही पाए जाने के बाद सीआरएस ने इस रेलखंड पर ट्रेन परिचालन की मंजूरी दे दी।
यह नई रेल लाइन 42 किलोमीटर लंबी नेउरा-दनियावां रेल परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना को दो हिस्सों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में 22.74 किलोमीटर लंबे जटडुमरी-दनियावां रेलखंड का निर्माण पूरा हो चुका है और इस पर ट्रेनें चल रही हैं। अब दूसरे हिस्से यानी नेउरा-जटडुमरी के 20 किलोमीटर लंबे रेलखंड को भी मंजूरी मिल गई है।दोनों हिस्सों के चालू होने से इस पूरे रेल मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस रेल लाइन का सबसे बड़ा फायदा मालगाड़ियों के परिचालन में देखने को मिल सकता है। अभी मालगाड़ियों को पटना के आसपास के व्यस्त रेलखंड से होकर गुजरना पड़ता है। नई लाइन पूरी तरह चालू होने के बाद मालगाड़ियां नेउरा से दनियावां, बिहारशरीफ, बरबीघा, शेखपुरा और किऊल के रास्ते आगे जा सकेंगी। इस तरह उन्हें पटना जंक्शन के आसपास के व्यस्त रेल मार्ग से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मालगाड़ियों के लिए वैकल्पिक रास्ता मिलने से दानापुर-पटना-किऊल-झाझा रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम होने की उम्मीद है। इस रेलखंड पर दिल्ली-हावड़ा मुख्य मार्ग की कई महत्वपूर्ण ट्रेनें चलती हैं।ऐसे में मालगाड़ियों की संख्या कम होने से यात्री ट्रेनों के परिचालन के लिए अतिरिक्त जगह मिल सकती है। इससे रेलवे को इस रूट पर ट्रेनों का संचालन बेहतर तरीके से करने में मदद मिलेगी।हालांकि, नई रेल लाइन शुरू होने से सभी ट्रेनों की देरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता। ट्रेनों का समय पर चलना कई दूसरे कारणों पर भी निर्भर करता है। लेकिन मालगाड़ियों के लिए अलग रास्ता उपलब्ध होने से व्यस्त रेल मार्ग पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका फायदा दिल्ली से पटना और बिहार के दूसरे शहरों की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी मिल सकता है।
इस परियोजना के तहत रेल यात्रियों और मालगाड़ियों के परिचालन को ध्यान में रखते हुए कई तरह के निर्माण कार्य भी किए गए हैं। नेउरा जंक्शन और जटडुमरी जंक्शन के बीच गोनपुरा स्टेशन बनाया गया है। इसके अलावा अधपा, चामाचक और वाजिदपुर में तीन हॉल्ट बनाए गए हैं। इस रेलखंड पर तीन बड़े पुल और 16 छोटे पुल भी तैयार किए गए हैं। रेलवे ने इस मार्ग पर सड़क यातायात को आसान बनाने के लिए पांच सीमित ऊंचाई वाले सबवे, दो रोड ओवरब्रिज, एक रेल ओवर रेल संरचना और 12 रोड अंडरब्रिज का निर्माण भी किया है। इन निर्माण कार्यों से रेल लाइन के आसपास सड़क और रेल यातायात के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, नेउरा-जटडुमरी रेलखंड को मंजूरी मिलना बिहार में रेल परिचालन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पूरी नेउरा-दनियावां रेल परियोजना के चालू होने पर मालगाड़ियों को पटना के व्यस्त रेल मार्ग से अलग रास्ता मिलेगा। इससे यात्री ट्रेनों के लिए रेल पटरियों पर दबाव कम करने और भविष्य में अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की संभावना बढ़ सकती है।




