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Bihar Assembly : लोहार को कमार उपजाति से अलग करने की मांग पर सियासत तेज, जानिए सरकार ने क्या दिया जवाब

बिहार विधानसभा में लोहार जाति को कमार उपजाति से अलग कर स्वतंत्र अधिसूचना की मांग उठी। मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा, मामला सुप्रीम कोर्ट में।

Bihar Assembly : लोहार को कमार उपजाति से अलग करने की मांग पर सियासत तेज, जानिए सरकार ने क्या दिया जवाब
Tejpratap
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4 मिनट

Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में आज लोहार जाति की सामाजिक स्थिति और वर्गीकरण को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। यह मामला तब उठा जब प्रश्नकाल के दौरान विधायक सतीश कुमार यादव ने सदन में सवाल उठाते हुए लोहार जाति को कमार की उपजाति की श्रेणी से हटाकर स्वतंत्र रूप से अधिसूचित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोहार समुदाय की अपनी अलग सामाजिक पहचान, परंपरा और इतिहास है, इसलिए इसे किसी अन्य जाति की उपश्रेणी में रखना उचित नहीं है।


सतीश कुमार यादव ने सरकार से पूछा कि यदि लोहार समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अलग है, तो उसे स्वतंत्र पहचान क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि वर्गीकरण की अस्पष्टता के कारण कई लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, स्पष्ट अधिसूचना से समुदाय को अधिकार और योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी।


इस पर जवाब देते हुए मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष सदन में रखा। उन्होंने कहा कि सरकार लोहार जाति की आर्थिक और सामाजिक स्थिति के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने लोहार समुदाय की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का निर्णय लिया था और इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव करना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक न्याय और समान अवसर प्रदान करना है।


मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रख रही है और समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।


विजय चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि यदि लोहार समुदाय को कहीं भी भेदभाव या सरकारी सुविधाओं में कमी का सामना करना पड़ रहा है, तो सरकार उसकी शिकायतों को गंभीरता से लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सभी प्रकार की प्रशासनिक परेशानियों को दूर करने के लिए तैयार है और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।


सदन में इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने अपनी-अपनी राय रखी। कुछ सदस्यों ने सामाजिक न्याय की दृष्टि से स्पष्ट वर्गीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया, तो कुछ ने न्यायालय के अंतिम निर्णय तक इंतजार करने की बात कही। कुल मिलाकर यह स्पष्ट रहा कि लोहार समुदाय के अधिकारों और हितों को लेकर राजनीतिक स्तर पर गंभीरता बनी हुई है।


अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा। तब तक सरकार ने भरोसा दिलाया है कि लोहार समुदाय को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।