Bihar land record issue : भूमि सुधार विभाग के लापता रिकॉर्ड पर सख्त हुए विजय सिन्हा, कहा- प्लान तैयार, यह लोग हो जाएं अलर्ट

बिहार विधानसभा में डुमरांव नगर पालिका के 45% खतियान को अनाबाद घोषित करने का मुद्दा उठा। मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 26 Feb 2026 12:11:59 PM IST

Bihar land record issue : भूमि सुधार विभाग के लापता रिकॉर्ड पर सख्त हुए विजय सिन्हा, कहा- प्लान तैयार, यह लोग हो जाएं अलर्ट

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Bihar land record issue : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में आज डुमरांव विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा भूमि सर्वेक्षण और खतियान का मामला जोर-शोर से उठा। डुमरांव के विधायक ने 1989 के सर्वे रिकॉर्ड में हुई कथित गड़बड़ी को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा और सुधार की मांग की।


विधायक ने सदन में कहा कि वर्ष 1989 के सर्वे में डुमरांव नगर पालिका क्षेत्र के लगभग 45 प्रतिशत सर्वे खतियान में भू-स्वामी के कॉलम में ‘अनाबाद बिहार सरकार’ दर्ज कर दिया गया है, जबकि पुराने अभिलेखों में, विशेषकर 1911-12 के सर्वे में, संबंधित जमीन पर मूल रैयतों का नाम दर्ज था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले से रैयतों के नाम दर्ज थे तो बाद के सर्वे में उन्हें सरकारी जमीन कैसे घोषित कर दिया गया। विधायक ने इसे गंभीर प्रशासनिक त्रुटि बताते हुए सरकार से पूछा कि जब गलती सामने आ चुकी है तो क्या सरकार इसे सुधारने का विचार रखती है।


इस पर उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जवाब दिया कि बक्सर के समाहर्ता के प्रतिवेदन के अनुसार डुमरा अंचल अंतर्गत डुमरांव नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 45 प्रतिशत सर्वे खतियान में 1989 के अभिलेखों में भू-स्वामी कॉलम में ‘अनाबाद बिहार सरकार’ दर्ज है, जबकि अधिकार के कॉलम में मूल रैयत के वंशजों का नाम अंकित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला ‘अनाबाद बिहार सरकार’ की भूमि से संबंधित है, जिस पर राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई की जाती है।


मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि जनता मॉल जैसे मामलों में भी यह सामने आया है कि कुछ भू-माफियाओं ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। ऐसे मामलों की जांच के लिए सर्वेक्षण कराया जा रहा है और जहां भी गड़बड़ी पाई जाएगी, वहां नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार की मंशा है कि न तो किसी की वैध जमीन छीनी जाए और न ही सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा होने दिया जाए।


हालांकि, डुमरांव के विधायक ने पुनः हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब 1911 में रैयत का नाम दर्ज था और 1989 में सरकार खुद मान रही है कि भूमि ‘अनाबाद’ हो गई, तो फिर अधिकार कॉलम में मूल रैयत के वंशजों का नाम दर्ज क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब लोग दाखिल-खारिज कराने जाते हैं तो उनका आवेदन निरस्त कर दिया जाता है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


इस पर मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जवाब देते हुए कहा कि कई स्थानों पर पुराने अभिलेखों के पृष्ठ गायब पाए गए हैं। सरकार इस संबंध में पूरी जानकारी एकत्र कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने जानबूझकर अभिलेखों को नष्ट किया है, छिपाया है या उनके साथ छेड़छाड़ की है तो ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार के पास ऐसे तंत्र (मेकैनिज्म) उपलब्ध हैं जिनके माध्यम से अभिलेखों की पुनः उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।


सदन में उठे इस मुद्दे ने स्पष्ट कर दिया कि भूमि अभिलेखों की पारदर्शिता और शुद्धता एक बड़ा सवाल बना हुआ है। डुमरांव क्षेत्र के हजारों लोगों की जमीन से जुड़े इस विवाद पर अब सरकार की आगामी कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।