1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 23 Feb 2026 11:47:24 AM IST
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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में आज तारांकित प्रश्न के दौरान एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला। आमतौर पर गंभीर मुद्दों और तीखी बहस के लिए पहचाने जाने वाले सदन में आज माहौल हल्का-फुल्का और खुशनुमा रहा। चर्चा का विषय था—बिहार की प्रसिद्ध मिठाइयों को GI (Geographical Indication) टैग दिलाने की मांग।
बहस की शुरुआत बाढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. सियाराम सिंह ने की। उन्होंने अपने क्षेत्र की प्रसिद्ध “खोभिया लाई” का जिक्र करते हुए कहा कि यह मिठाई अपनी खास पहचान रखती है और इसे GI टैग मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ की लाई सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में लोकप्रिय है और इसकी विशिष्टता को राष्ट्रीय पहचान मिलनी चाहिए।
इस पर ऊर्जा विभाग के मंत्री ने टिप्पणी की कि यह विषय कृषि विभाग से जुड़ा है, इसलिए संबंधित विभाग ही इस पर आगे की कार्रवाई कर सकता है। इसके बाद उद्योग विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल इस विषय पर जवाब देने लगे। उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि इसके लिए प्रक्रिया की जा रही है।इससे पहले कई उत्पाद को बिहार सरकार ने जीआई टैग दिलाई है।
इसी दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा भी अपनी जगह से खड़े हुए और उन्होंने कहा कि यदि बाढ़ की लाई को GI टैग देने की बात हो रही है, तो बड़हिया के रसगुल्ले को भी यह सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़हिया का रसगुल्ला भी काफी प्रसिद्ध है और उसकी अपनी अलग पहचान है। यह दोनों मिठाई मंत्री दिलीप जायसवाल खाते हैं लेकिन इसके जीआई टैग के लिए प्रयास नहीं करते हैं। इसके बाद मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि आज तक विजय सिन्हा जी ने बड़हिया का रसगुल्ला मुझे नहीं खिलाया है।
इसके बाद सदन में मानो मिठाइयों की झड़ी लग गई। अलग-अलग क्षेत्रों के विधायकों ने अपने-अपने इलाके की प्रसिद्ध मिठाइयों का जिक्र करना शुरू कर दिया और उन्हें GI टैग दिलाने की मांग उठाने लगे। किसी ने लड्डू का जिक्र किया तो किसी ने रस्कदम, अनारसा , तिलकुट, दही,अन्य स्थानीय मिठाइयों का।
माहौल उस समय और भी रोचक हो गया जब उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मजाकिया अंदाज में सुझाव दिया कि एक दिन विधानसभा में बिहार की सभी प्रसिद्ध मिठाइयों की प्रदर्शनी लगा दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ विधायकों को अलग-अलग क्षेत्रों की मिठाइयों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और खाद्य विविधता भी सामने आएगी। उन्होंने कहा कि चलते सत्र में वंसत उत्सव होता है तो इसी में करवा दिया जाए, इसके बाद स्पीकर ने कहा कि हम 25 तारीख को ऐसा करवाने का कोशिश करते हैं।
सदन में इस सुझाव पर ठहाके भी लगे और कुछ देर के लिए राजनीतिक बहस की जगह मिठास भरी चर्चा ने ले ली। हालांकि GI टैग दिलाने की प्रक्रिया एक औपचारिक और कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन आज की चर्चा ने यह जरूर दिखा दिया कि बिहार की पारंपरिक मिठाइयों को लेकर जनप्रतिनिधियों में खास लगाव है।