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Bihar Vidhan Sabha : मंत्री नहीं बनने की टीस ! भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने नगर विकास मंत्री को फंसाया तो विजय सिन्हा ने दिया जवाब- ये भी तो नगर विकास मंत्री रहे हैं

बिहार विधानसभा के प्रश्नकाल में भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने धारा 100 के अनुपालन और नगर इकाइयों को संपत्ति हस्तांतरण पर सरकार से जवाब मांगा।

Bihar Vidhan Sabha : मंत्री नहीं बनने की टीस ! भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने नगर विकास मंत्री को फंसाया तो विजय सिन्हा ने दिया जवाब- ये भी तो नगर विकास मंत्री रहे हैं
Tejpratap
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5 मिनट

Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को प्रश्नकाल में नगरपालिका अधिनियम की धारा 100 के अनुपालन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सरकार से पूछा कि जब किसी क्षेत्र को नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत घोषित किया जाता है तो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वहां की सार्वजनिक संपत्तियां—जैसे पोखर, तालाब, बाजार और अन्य आय के स्रोत—संबंधित नगर इकाई को हस्तांतरित हो जानी चाहिए। इसके बावजूद कई जगहों पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं दिए जाने के कारण योजनाएं अटकी हुई हैं। इसके बाद विजय सिन्हा ने कहा कि- विधायक जी तो खुद भी इस विभाग में मंत्री रहे हैं तो उनको सब बात अच्छी तरह से मालूम है।


दरअसल, जीवेश मिश्रा ने कहा कि उन्होंने यह प्रश्न मंत्रिमंडल सचिवालय से संबंधित विषय के रूप में उठाया था, लेकिन इसे नगर विकास विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया। उनका कहना था कि 2007 के नगरपालिका अधिनियम में धारा 100 स्पष्ट रूप से प्रावधान करती है कि अधिसूचना जारी होते ही संबंधित परिसंपत्तियां नगर इकाई के अधीन आ जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समग्र विकास की कई योजनाएं केवल इस कारण अटक रही हैं क्योंकि भूमि हस्तांतरण और राजस्व स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।


उन्होंने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बड़ी संख्या में नई नगर इकाइयों की घोषणा की गई, आबादी में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए अधिसूचनाएं भी जारी हुईं, लेकिन जमीन और बाजार जैसे राजस्व स्रोत नगर इकाइयों को नहीं दिए जा रहे हैं। ऐसे में होल्डिंग टैक्स वसूली का औचित्य भी सवालों के घेरे में है। उनका तर्क था कि यदि नगर इकाई को बाजार और अन्य आय के साधन नहीं मिलेंगे तो उसके संचालन और विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।


इस पर विभागीय मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जवाब देते हुए कहा कि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया बिहार दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 के नियम 6 के तहत की जाती है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले मामला अंचल अधिकारी के स्तर पर देखा जाता है, इसके बाद अपील डीसीएलआर के न्यायालय में और फिर पुनरीक्षण उच्च स्तर पर किया जाता है। मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर आवेदन और अपीलें लंबित हैं, जिनकी समीक्षा की जा रही है।


मंत्री ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में प्रशासनिक कारणों—जैसे अधिकारियों का स्थानांतरण और कर्मियों की हड़ताल—से कार्यों की गति प्रभावित हुई थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो रही है और नियमों के अनुरूप मामलों का निपटारा किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार सभी विवादों का समाधान त्वरित गति से करने के लिए प्रतिबद्ध है।


जीवेश मिश्रा ने पुनः हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह केवल राजस्व का नहीं बल्कि नगर इकाइयों की कार्यक्षमता का प्रश्न है। यदि नगर परिषद या नगर निगम को अधिसूचना के बाद भी अपने अधिकार नहीं मिलते हैं तो विकास कार्य बाधित होंगे और स्थानीय निकाय वित्तीय रूप से कमजोर रहेंगे।


जवाब में विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि - जीवेश मिश्रा जी खुद इस विभाग में मंत्री रहे हैं और उनको मालूम है कि कई स्थानों पर जिला परिषद, नगर परिषद और नगर निगम के बीच परिसंपत्तियों को लेकर दावेदारी और विवाद की स्थिति बनी हुई है। सरकार इन जटिल मामलों की गंभीरता से समीक्षा कर रही है और चरणबद्ध तरीके से समाधान निकाला जाएगा ताकि विकास योजनाओं पर असर न पड़े।


प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया कि अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा होगा, लेकिन विपक्ष ने इसे नगर इकाइयों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए ठोस कार्रवाई की मांग की।