1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 27, 2026, 12:02:12 PM
- फ़ोटो
Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान आज एक बार फिर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एक ही मुद्दे पर एकजुट नजर आए। आम तौर पर सदन में विभिन्न विषयों पर मतभेद देखने को मिलते हैं, लेकिन ऊर्जा विभाग से जुड़े एक गंभीर सवाल ने सभी दलों के विधायकों को एक साथ खड़ा कर दिया। मुद्दा था—राज्य के विभिन्न इलाकों में घरों के ऊपर या बिल्कुल सटे हुए गुजर रहे बिजली के तार, जो लोगों के जीवन के लिए खतरा बने हुए हैं।
विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार से पूछा कि पूरे बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे घर हैं जिनके ऊपर से या बगल से हाई वोल्टेज बिजली के तार गुजर रहे हैं। इससे न केवल दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, बल्कि बरसात और आंधी के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में मकान पहले से बने हुए थे, बाद में बिजली विभाग ने लाइन खींच दी, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
जब इस पर विजेंद्र प्रसाद यादव की ओर से जवाब दिया गया तो बताया गया कि यदि किसी उपभोक्ता को अपने घर के ऊपर से गुजर रहे तार को हटवाना है तो उसे आवेदन देना होता है और निर्धारित राशि जमा करनी होती है। राशि जमा होने के बाद ही तकनीकी प्रक्रिया के तहत तार को शिफ्ट किया जाता है। इस पर राघवेंद्र प्रताप सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह राशि काफी अधिक होती है और अधिकांश लोग इसे देने की स्थिति में नहीं होते। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार जनहित में कई योजनाओं पर खर्च करती है, तो इस तरह के छोटे लेकिन गंभीर सुरक्षा मुद्दे पर लोगों से पैसा क्यों लिया जा रहा है?
ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि “हर घर बिजली” योजना के तहत व्यापक स्तर पर विद्युतीकरण किया गया था। बाद में कई लोगों ने अपने मकान बनाए, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि, विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने मंत्री के इस तर्क पर असहमति जताई और कहा कि कई मामलों में घर पहले से बने हुए थे और बाद में लाइन डाली गई।
मंत्री विजेंद्र यादव अपनी बात पर कायम रहे और कहा कि यदि कोई सदस्य लिखित रूप में यह दे कि घर पहले बना था और बाद में बिजली की लाइन गई, तो वह मामले की जांच करवाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तार हटाने की प्रक्रिया तकनीकी आधार पर ही संभव है और इसके लिए शुल्क निर्धारित है। यदि कोई उपभोक्ता शुल्क जमा करता है, तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
इस दौरान सदन का माहौल गर्म हो गया। राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसे अन्य मुद्दों की तरह लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पीकर से अपेक्षा जताई कि सदन में उठाए गए गंभीर सवालों पर सरकार ठोस निर्णय ले। उन्होंने पूर्व में उठाए गए कैशलेस व्यवस्था के मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस पर भी त्वरित निर्णय का आश्वासन मिला था, जिसकी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
इस बहस में विधायक शालनी मिश्रा ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जिस तरह सरकार ने बिजली बिल पर ब्याज माफ करने जैसी पहल की है, उसी तरह इस विषय पर भी राहत की योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों से शुल्क न लिया जाए या रियायत दी जाए। वहीं, विधायक मुरारी मोहन झा ने कहा कि यदि किसी के घर की छत के ऊपर से 11 हजार वोल्ट का तार गुजर रहा है तो उसका खर्च सरकार को वहन करना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर जनसुरक्षा से जुड़ा मामला है।
स्थिति तब और तीखी हो गई जब सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के विधायक एक साथ खड़े होकर सरकार से नियमों में संशोधन की मांग करने लगे। सदन में कुछ देर के लिए हंगामा भी हुआ। अंततः स्पीकर प्रेम कुमार ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सभी सदस्यों के सुझावों के आलोक में सरकार इस मामले की समीक्षा करेगी। उन्होंने सदस्यों से लिखित सुझाव देने को कहा और आश्वासन दिया कि त्वरित कार्रवाई की जाएगी।