Bihar News : बिहार में पिछले चार महीने से बालू खनन पर लगी रोक अब खत्म होने जा रही है। 16 अक्टूबर से राज्य में एक बार फिर बालू खनन और उठाव शुरू हो जाएगा। इसका सीधा असर निर्माण कार्यों पर पड़ने की उम्मीद है। बालू की उपलब्धता बढ़ने से मकान बनवा रहे लोगों, बिल्डरों और निर्माण कार्यों से जुड़े कारोबारियों को राहत मिल सकती है। शुरुआती चरण में राज्य के 212 बालू घाटों से खनन और बालू का उठाव किया जाएगा। इनमें पीले बालू के 181 और उजले बालू के 31 घाट शामिल हैं।
मानसून के दौरान नदियों में खनन पर रोक लगाए जाने के कारण निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को बालू की आपूर्ति का इंतजार करना पड़ रहा था। अब खनन दोबारा शुरू होने से बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इसका असर कीमतों पर कितना पड़ेगा, यह आपूर्ति, परिवहन और स्थानीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, बिहार में हर साल बारिश के मौसम को देखते हुए 15 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों में बालू खनन पर रोक रहती है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद 16 अक्टूबर से खनन गतिविधियां फिर शुरू की जा रही हैं। विभाग का मानना है कि नए नीलाम किए गए घाटों से भी आने वाले समय में आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे निर्माण क्षेत्र की गतिविधियों को गति मिल सकती है।
खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा है कि बालू खनन का काम पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित सरकारी नियमों के अनुसार कराया जाएगा। सरकार का जोर वैध खनन गतिविधियों को बढ़ावा देने और राजस्व संग्रह में सुधार करने पर है। ऐसे में खनन शुरू होने के साथ ही विभाग के सामने नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने और नियमों के पालन की जिम्मेदारी भी रहेगी।
इस बीच बालू घाटों की नीलामी को लेकर भी विभाग ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। 15 जून 2026 से खनन पर रोक लगने के बाद पिछले चार महीनों में पहले से नीलाम नहीं हो सके 10 बालू घाटों की निविदा प्रक्रिया पूरी की गई है। इन घाटों में से नौ पर मार्च 2027 से खनन शुरू होने की संभावना जताई गई है। इन नौ घाटों से सरकार को लगभग 76 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। इससे आने वाले महीनों में बालू की आपूर्ति बढ़ाने के साथ सरकारी खजाने को भी फायदा हो सकता है।
बालू खनन से जुड़ा यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राज्य में निर्माण क्षेत्र को रफ्तार देने की जरूरत है। घर बनाने वाले आम लोगों से लेकर बड़े निर्माण प्रोजेक्ट चलाने वाले कारोबारियों तक के लिए बालू एक जरूरी सामग्री है। ऐसे में खनन शुरू होने के बाद बाजार में इसकी उपलब्धता पर लोगों की नजर रहेगी। यदि घाटों से नियमित उठाव होता है और परिवहन व्यवस्था सुचारु रहती है, तो निर्माण कार्यों में आ रही परेशानियां कम हो सकती हैं।
वहीं, खान एवं भूतत्व विभाग के राजस्व संग्रह के आंकड़े भी चर्चा में हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सितंबर तक विभाग को 1,220.53 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह आंकड़ा 862.64 करोड़ रुपये था। यानी इस बार राजस्व संग्रह में 357.89 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रतिशत के हिसाब से यह वृद्धि 41.48 फीसदी है।
अब 16 अक्टूबर से बालू खनन दोबारा शुरू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि बाजार में पीले और उजले बालू की आपूर्ति कितनी तेजी से सामान्य होती है। 212 घाटों से खनन और उठाव शुरू होने के साथ निर्माण क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, आम लोगों को सस्ती बालू मिलेगी या नहीं, इसका पता आने वाले दिनों में बाजार की कीमतों और वास्तविक आपूर्ति से ही चलेगा।





