1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 11, 2026, 1:03:33 PM
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Rajya Sabha Election : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब बेहद रोमांचक हो गया है। इस बार मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प बन गया है क्योंकि पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं। ऐसे में एक-एक वोट की अहमियत काफी बढ़ गई है और सभी दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। खासकर पांचवीं सीट को लेकर सियासी गणित पूरी तरह उलझ गया है, जहां जीत-हार का फैसला छोटे दलों और कुछ विधायकों के रुख पर निर्भर करता दिखाई दे रहा है।
राज्यसभा चुनाव के इस समीकरण में एनडीए ने अपने पांच उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि महागठबंधन की ओर से एक प्रत्याशी मैदान में है। ऐसे में अगर सभी वोट अपने-अपने खेमे में पड़े तो मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है। फिलहाल नजरें एआईएमआईएम और बसपा के विधायकों पर टिकी हुई हैं, जिनकी भूमिका इस चुनाव में निर्णायक मानी जा रही है।
इसी कड़ी में बिहार की सियासत आज उस वक्त और गर्म हो गई जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान के पहुंचने की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि दोपहर दो बजे दोनों नेताओं के बीच मुलाकात तय है। इस बैठक को राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि एआईएमआईएम के पांच विधायक विपक्ष की संभावनाओं को मजबूत कर सकते हैं।
हालांकि इस मुलाकात से पहले अख्तरुल ईमान ने जो बयान दिया, उसने दोनों राजनीतिक खेमों में हलचल पैदा कर दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बेहद शायराना अंदाज में अपनी राजनीतिक स्थिति साफ करते हुए कहा, “सियासी चक्कर में हम किधर जाएं? एक तरफ दरिंदा है और दूसरी तरफ शिकारी, मैं तो दोनों से बच-बचकर चलता हूं।” उनके इस बयान को एनडीए और महागठबंधन दोनों पर तंज के रूप में देखा जा रहा है।
ईमान ने यह भी स्पष्ट किया कि वे तेजस्वी यादव से मिलने जरूर जा रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ही करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि अगर बातचीत में कोई सहमति नहीं बनती है तो एआईएमआईएम तटस्थ रहने का विकल्प भी चुन सकती है। इस स्थिति में पांचवीं सीट का गणित पूरी तरह बदल सकता है।
इस बीच बिहार विधानसभा के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में उतरे छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। इसी वजह से राज्य में एक दशक से अधिक समय बाद राज्यसभा के लिए मतदान की नौबत आई है। आमतौर पर जब उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होती है तो निर्विरोध चुनाव हो जाता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है।
महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने व्यवसायी से नेता बने अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाह और शिवेश कुमार सहित अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं। सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
संख्याबल के हिसाब से देखें तो बिहार विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत होती है। एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं, जबकि सभी पांच सीटों पर जीत के लिए उसे 205 वोटों की जरूरत पड़ेगी। यानी एनडीए को कम से कम तीन अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी।
दूसरी ओर महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। अगर एआईएमआईएम के पांच विधायक और बसपा का एक विधायक विपक्ष के साथ आ जाते हैं तो कुल संख्या 41 तक पहुंच सकती है, जिससे महागठबंधन एक सीट जीतने की स्थिति में आ सकता है। हालांकि इसमें क्रॉस वोटिंग की संभावना भी पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।
यही वजह है कि बिहार की राजनीति में इस समय राज्यसभा चुनाव को लेकर जबरदस्त हलचल है। सभी दल अपने-अपने विधायकों को साधने और संभावित सहयोगियों से बातचीत में जुटे हैं। अब सबकी निगाहें एआईएमआईएम और बसपा के रुख पर टिकी हैं, क्योंकि पांचवीं सीट की असली चाबी फिलहाल उन्हीं के हाथ में मानी जा रही है।