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Bihar Tourism : पटना से डोभी तक ग्रीन कॉरिडोर: हर 10 किलोमीटर पर सेल्फी पॉइंट, फलदार पेड़ों से सजेगा एनएच; मंत्री का एलान

बिहार सरकार ने पटना से डोभी तक ग्रीन कॉरिडोर बनाने की योजना की घोषणा की। हर 10 किलोमीटर पर सेल्फी पॉइंट, एनएच किनारे फलदार वृक्ष और इको टूरिज्म कमेटी से रख-रखाव सुनिश्चित किया जाएगा। पर्यावरण और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली यह पहल जल्द शुरू होगी।

Bihar Tourism : पटना से डोभी तक ग्रीन कॉरिडोर: हर 10 किलोमीटर पर सेल्फी पॉइंट, फलदार पेड़ों से सजेगा एनएच; मंत्री का एलान
Tejpratap
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Bihar Tourism : बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखा पहल शुरू किया है। सरकार ने घोषणा की है कि पटना से डोभी तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य सिर्फ सड़क को हरा-भरा बनाना ही नहीं है, बल्कि यात्रियों के लिए एक आकर्षक और प्राकृतिक अनुभव सुनिश्चित करना भी है।


इस ग्रीन कॉरिडोर में कुल मार्ग को पर्यावरण अनुकूल तरीके से सजाया जाएगा। सड़क किनारे किसी भी तरह का कंक्रीट काम नहीं होगा। पूरे कॉरिडोर में प्राकृतिक हरियाली और स्थानीय वनस्पतियों का संरक्षण किया जाएगा। इस पहल के तहत यात्रियों और पर्यटकों के लिए हर 10 किलोमीटर पर विशेष सेल्फी पॉइंट बनाए जाएंगे। ये पॉइंट न केवल खूबसूरत दृश्य प्रदान करेंगे बल्कि लोगों को प्रकृति के बीच यादगार पलों को कैद करने का अवसर भी देंगे।


बिहार के ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में इस परियोजना का बड़ा महत्व है। ग्रीन कॉरिडोर के किनारे किसानों से आग्रह किया जाएगा कि वे अपने खेतों और एनएच (राष्ट्रीय राजमार्ग) के किनारे फलदार वृक्ष लगाएं। इसके अलावा स्थानीय फलदार और फूलदार पेड़ लगाए जाने से न केवल सड़क का सौंदर्य बढ़ेगा बल्कि पर्यावरणीय लाभ भी मिलेगा। फलदार पेड़ स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकते हैं।


परियोजना के रख-रखाव और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए इको टूरिज्म कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में स्थानीय प्रशासन, ग्रामीण प्रतिनिधि और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल होंगे। कमेटी का मुख्य कार्य ग्रीन कॉरिडोर की सफाई, हरियाली की निगरानी और पर्यटक सुविधाओं के रख-रखाव को सुनिश्चित करना होगा। साथ ही, यह कमेटी पर्यावरणीय शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगी, ताकि स्थानीय समुदाय और यात्रियों को प्रकृति के महत्व का एहसास हो।


बिहार सरकार की यह पहल पर्यावरण और पर्यटन को जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है। इस ग्रीन कॉरिडोर से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी बल्कि राज्य में सस्टेनेबल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने विधानसभा में सदन में इस परियोजना की घोषणा करते हुए कहा कि यह पहल राज्य की जनता और आने वाले पर्यटकों के लिए प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव सुनिश्चित करेगी।


परियोजना के तहत सड़क किनारे सभी पेड़ और पौधे स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप चुने जाएंगे। इसमें आम, अमरुद, नींबू, आमला, लीची और अन्य फलदार वृक्षों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न केवल सड़क हरी-भरी दिखेगी बल्कि स्थानीय जैव विविधता को भी संरक्षण मिलेगा।


विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन कॉरिडोर जैसी पहल लंबी अवधि में पर्यावरणीय सुधार, पर्यटन आकर्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती हैं। सेल्फी पॉइंट्स और फलदार वृक्षों के संयोजन से यात्रियों को आकर्षक स्थलों पर रुकने और स्थानीय उत्पादों का अनुभव लेने का अवसर मिलेगा।


सरकार ने यह भी बताया कि इस परियोजना के तहत लोगों को पर्यावरण संरक्षण और स्थायी पर्यटन के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही, स्थानीय किसानों और समुदाय को इस पहल में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।


गौरतलब है कि बिहार में पहले भी कई हरे-भरे पहलें शुरू की गई हैं, लेकिन पटना से डोभी तक का यह गोल्डन ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का पैमाना और आकर्षण इसे विशेष बनाता है। इसे राज्य के लिए पर्यटन और पर्यावरण की दृष्टि से मील का पत्थर माना जा रहा है।


मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा, “हम चाहते हैं कि बिहार सिर्फ सड़क नेटवर्क के मामले में ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में भी एक मॉडल राज्य बने। यह ग्रीन कॉरिडोर बिहार के लिए एक नई पहचान और स्थानीय समुदाय के लिए एक स्थायी लाभ होगा।”


इस परियोजना की शुरुआत अगले महीने से होने की संभावना है और इसे धीरे-धीरे पूरे पटना से डोभी तक विस्तार देने की योजना है। पूरे कॉरिडोर के बनने के बाद यह बिहार का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन जाएगा।