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Bihar Panchayat Election Postponed: बिहार पंचायत चुनाव एक साल टला, अब 2027 में होंगे चुनाव! 36 साल बाद होगा नया परिसीमन, सरकार का बड़ा फैसला

बड़ी खबर! बिहार में इस साल पंचायत चुनाव नहीं होंगे। सरकार ने चुनाव एक साल के लिए टाल दिया है। 36 साल बाद पंचायतों का नया परिसीमन होगा। जानिए कब होंगे चुनाव और क्या है पूरा मामला।

Bihar Panchayat Election Postponed: बिहार पंचायत चुनाव एक साल टला, अब 2027 में होंगे चुनाव! 36 साल बाद होगा नया परिसीमन, सरकार का बड़ा फैसला
Tejpratap
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पटना: बिहार की राजनीति और ग्रामीण प्रशासन से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने इस वर्ष प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को एक साल के लिए टालने का फैसला किया है। अब अक्टूबर-नवंबर 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव अगले वर्ष जुलाई-अगस्त 2027 में कराए जाने की संभावना है। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण 36 वर्षों बाद पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) और पिछड़े वर्गों के आरक्षण को लेकर बनने वाले डेडिकेटेड कमीशन की प्रक्रिया बताई जा रही है।


सरकार के इस फैसले से लाखों पंचायत प्रतिनिधियों, संभावित उम्मीदवारों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव टलने के बावजूद पंचायतों में विकास कार्य नहीं रुकेंगे और वर्तमान जनप्रतिनिधि ही अगले 9 से 10 महीने तक अपने दायित्व निभाते रहेंगे।


36 साल बाद होगा पंचायतों का नया परिसीमन

सरकार ने निर्णय लिया है कि बिहार की सभी ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन कराया जाएगा। यह परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। जानकारी के अनुसार पिछले करीब 36 वर्षों से पंचायत क्षेत्रों का व्यापक परिसीमन नहीं हुआ है, जिसके कारण कई पंचायतों में आबादी का असंतुलन पैदा हो गया है। कहीं बहुत अधिक आबादी वाले वार्ड हैं तो कहीं कम आबादी वाले। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतों की सीमाएं आबादी के अनुरूप तय की जाएंगी, जिससे प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और न्यायसंगत हो सके।


अगस्त से शुरू होगी प्रक्रिया, अप्रैल 2027 तक चलेगा काम

पंचायती राज विभाग के अनुसार अगस्त 2026 से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह कार्य कई चरणों में पूरा होगा और अप्रैल 2027 तक समाप्त होने की संभावना है। इस दौरान पंचायतों, वार्डों और पंचायत समिति क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर आपत्तियां और सुझाव भी लिए जाएंगे, जिसके बाद अंतिम परिसीमन अधिसूचित किया जाएगा।


डेडिकेटेड कमीशन भी बनेगा, तभी तय होगा आरक्षण

परिसीमन के बाद सरकार पिछड़े वर्गों के आरक्षण को लेकर एक डेडिकेटेड कमीशन का गठन करेगी। यह आयोग पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्गों की भागीदारी और आरक्षण के संबंध में अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगा। बताया जा रहा है कि यह कमीशन लगभग 2 से 3 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। रिपोर्ट मिलने के बाद ही पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इन्हीं तकनीकी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के कारण पंचायत चुनाव का पूरा कार्यक्रम लगभग एक वर्ष आगे बढ़ गया है।


वर्तमान प्रतिनिधि ही संभालेंगे पंचायत की जिम्मेदारी

सरकार ने संकेत दिया है कि पंचायत चुनाव टलने की स्थिति में मौजूदा मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य अगले 9 से 10 महीने तक पंचायतों का कामकाज संभाल सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण विकास योजनाएं, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और पंचायत स्तर के प्रशासनिक कार्य किसी भी स्थिति में प्रभावित न हों। इससे पहले वर्ष 2021 में भी कोरोना महामारी के कारण पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हो पाए थे। उस समय भी पंचायतों के संचालन के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी।


सरकार ने क्या कहा?

पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार की मंशा तय समय पर पंचायत चुनाव कराने की थी, लेकिन परिसीमन और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नए परिसीमन से पंचायतों में आबादी के अनुसार संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा और सामाजिक तथा भौगोलिक असमानता भी दूर होगी। सरकार चाहती है कि चुनाव पूरी पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संपन्न हों।


ग्रामीण राजनीति पर पड़ेगा बड़ा असर

चुनाव टलने का सीधा असर उन हजारों संभावित उम्मीदवारों पर पड़ेगा, जो इस वर्ष चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। अब उन्हें करीब एक वर्ष और इंतजार करना होगा। वहीं वर्तमान जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल भी प्रभावी रूप से आगे बढ़ जाएगा, जिससे पंचायत स्तर पर प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी। राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति बनाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।


क्या होंगे इस फैसले के बड़े फायदे?

  • 36 साल बाद पंचायतों का वैज्ञानिक और संतुलित परिसीमन होगा। 2011 की जनसंख्या के अनुसार वार्ड और पंचायतों की नई सीमाएं तय होंगी। आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। पिछड़े वर्गों के आरक्षण की प्रक्रिया संवैधानिक रूप से पूरी होगी। पंचायतों के विकास कार्य बिना रुकावट जारी रहेंगे। वर्तमान जनप्रतिनिधियों के माध्यम से योजनाओं का संचालन चलता रहेगा।


फिलहाल क्या है स्थिति?

फिलहाल बिहार में पंचायत चुनाव इस वर्ष नहीं होंगे। सरकार अब पहले परिसीमन, फिर डेडिकेटेड कमीशन की रिपोर्ट और उसके बाद आरक्षण एवं चुनावी प्रक्रिया पूरी करेगी। यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो जुलाई-अगस्त 2027 में बिहार पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना है। ऐसे में आने वाला एक वर्ष पंचायत व्यवस्था, ग्रामीण राजनीति और चुनावी समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।