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Bihar MLC Election 2026 : बिहार विधान परिषद चुनाव में शिक्षकों ने दिखाया दम, ग्रेजुएट सीटों पर भी जमकर हुई वोटिंग; जानिए कहां कितनी पड़ी वोट

बिहार विधान परिषद चुनाव में शिक्षकों ने जमकर वोट डाले। चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, शिक्षक सीटों पर 82.85% और स्नातक सीटों पर 53.42% मतदान हुआ। सारण शिक्षक सीट और पटना स्नातक सीट मतदान में सबसे आगे रहीं।

Bihar MLC Election 2026 : बिहार विधान परिषद चुनाव में शिक्षकों ने दिखाया दम, ग्रेजुएट सीटों पर भी जमकर हुई वोटिंग; जानिए कहां कितनी पड़ी वोट
Tejpratap
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Bihar MLC Election 2026  : बिहार में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन सीटों के चुनाव में इस बार मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चुनाव आयोग की ओर से जारी अंतिम मतदान प्रतिशत के आंकड़े बता रहे हैं कि खासकर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में वोटरों का उत्साह देखते ही बना। शिक्षक सीटों पर कुल 82.85 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 53.42 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। दोनों श्रेणियों के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला, लेकिन स्नातक सीटों पर भी मतदाताओं की भागीदारी चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए काफी है।


चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मतदान सारण सीट पर हुआ। यहां 89.05 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना सीट सबसे आगे रही, जहां 57.56 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन आंकड़ों के बाद अब सबकी नजर मतगणना पर टिक गई है। प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद है और नतीजों का इंतजार बढ़ गया है।


शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदान प्रतिशत पर नजर डालें तो सारण ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया। यहां 89.05 प्रतिशत मतदान हुआ। दूसरे स्थान पर दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र रहा, जहां 85.87 प्रतिशत वोट पड़े। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 82.99 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 74.75 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। चारों सीटों के आंकड़े बताते हैं कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान को लेकर अच्छी भागीदारी रही। कुल मिलाकर इन सीटों पर 82.85 प्रतिशत मतदान हुआ।


शिक्षक सीटों के आंकड़ों में सारण का शीर्ष पर रहना खास है। यहां मतदान प्रतिशत ने बाकी तीनों निर्वाचन क्षेत्रों को पीछे छोड़ दिया। दरभंगा और तिरहुत में भी मतदान का आंकड़ा 80 प्रतिशत से ऊपर रहा। पटना शिक्षक सीट पर मतदान अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन यहां भी करीब तीन चौथाई मतदाताओं ने वोट डाले। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अधिक मतदान वाले इन क्षेत्रों में किस प्रत्याशी को इसका फायदा मिलता है।


स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की बात करें तो यहां मतदान का कुल प्रतिशत 53.42 रहा। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 57.56 प्रतिशत मतदान हुआ। दरभंगा और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत समान रहा। दोनों जगह 54.73 प्रतिशत वोट पड़े। वहीं, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 48.51 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो चारों स्नातक सीटों में सबसे कम है।


स्नातक सीटों पर मतदान के आंकड़े बताते हैं कि पटना में मतदाताओं की भागीदारी सबसे ज्यादा रही। दरभंगा और कोसी में भी आधे से अधिक मतदाताओं ने वोट डाले। दूसरी ओर, तिरहुत में मतदान 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार नहीं कर सका। हालांकि, केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर किसी प्रत्याशी की जीत या हार का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही सामने आएगा।


इस चुनाव में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के आंकड़ों के बीच सबसे बड़ी बात दोनों श्रेणियों के मतदान प्रतिशत का अंतर है। शिक्षक सीटों पर 82.85 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि स्नातक सीटों पर यह आंकड़ा 53.42 प्रतिशत रहा। यानी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत स्नातक सीटों की तुलना में काफी अधिक रहा। इससे साफ है कि दोनों श्रेणियों में मतदाताओं की भागीदारी का स्तर अलग-अलग रहा।


अब चुनावी प्रक्रिया का अगला सबसे अहम पड़ाव मतगणना है। प्रत्याशी और उनके समर्थक अपने-अपने क्षेत्रों के मतदान प्रतिशत का आकलन कर जीत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हालांकि, अधिक मतदान का मतलब किसी एक प्रत्याशी की जीत तय होना नहीं है। मतदान का वास्तविक असर किसके पक्ष में गया, यह मतों की गिनती के बाद ही स्पष्ट होगा।


बिहार विधान परिषद चुनाव के अंतिम मतदान प्रतिशत ने तस्वीर का एक अहम हिस्सा सामने रख दिया है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सारण सबसे आगे रहा, जबकि स्नातक सीटों में पटना ने बाजी मारी। अब सवाल यही है कि इन आंकड़ों के पीछे छिपा मतदाताओं का रुझान किस प्रत्याशी के पक्ष में निकलेगा। इसका जवाब मतगणना के दिन मिलेगा, जब प्रत्याशियों की राजनीतिक किस्मत का फैसला होगा।