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Bihar Liquor Ban : बिहार में शराबबंदी पर CM सम्राट का जवाब, बोले- ‘20 हजार करोड़ का हो रहा नुकसान, फिर...

बिहार में शराबबंदी को लेकर CM सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने माना कि सरकार को करीब 20 हजार करोड़ का नुकसान होता है, लेकिन महिलाओं के सम्मान और समर्थन को देखते हुए शराबबंदी पर किसी समझौते से साफ इनकार कर दिया।

Bihar Liquor Ban : बिहार में शराबबंदी पर CM सम्राट का जवाब, बोले- ‘20 हजार करोड़ का हो रहा नुकसान, फिर...
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

पटनाः बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए करीब एक दशक का समय गुजरने को है, लेकिन राज्य में इस कानून की पूरी तरह से तस्वीर बदलने का दावा करना अभी भी आसान नहीं है। सरकार की सख्ती और लगातार कार्रवाई के बावजूद आए दिन कहीं न कहीं से शराब की बरामदगी और जहरीली शराब से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में एक बार फिर बिहार की शराबबंदी को लेकर बड़ा सवाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने रखा गया।

मुख्यमंत्री से जब पूछा गया कि शराबबंदी के इतने वर्षों बाद भी क्या बिहार में पूरी तरह शराब बंद हो पाई है और क्या सरकार इस नीति में किसी तरह का बदलाव या समझौता करने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने साफ शब्दों में अपना रुख स्पष्ट किया।

‘जहरीली शराब का सेवन चिंता का विषय’

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि जहरीली शराब का सेवन निश्चित रूप से चिंता का विषय है। उन्होंने शराबबंदी को बिहार के लिए एक ऐतिहासिक फैसला बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में लिए गए बड़े फैसलों की बात की जाए तो शराबबंदी उनमें सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शराबबंदी की वजह से सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है।

सवाल: सरकार को कितना नुकसान?

जब शराबबंदी से होने वाले आर्थिक नुकसान को लेकर सवाल किया गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को करीब 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होता है। यानी एक तरफ सरकार के सामने हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का सवाल है, तो दूसरी तरफ शराबबंदी को लेकर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिबद्धता भी बनी हुई है। मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि सरकार आर्थिक नुकसान को शराबबंदी खत्म करने की वजह नहीं मानती।

‘महिलाओं के समर्थन की वजह से लिया गया था फैसला’

मुख्यमंत्री ने शराबबंदी के पीछे बिहार की महिलाओं की भूमिका को भी प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार की महिलाओं की मांग और उनके संवाद के आधार पर ही शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया गया था।सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी सिर्फ सरकार की नीति नहीं है, बल्कि बिहार की आधी आबादी के सम्मान से भी जुड़ी हुई है।यही वजह है कि सरकार शराबबंदी को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, महिलाओं के समर्थन को देखते हुए शराबबंदी जारी रहेगी।

सवाल: क्या शराबबंदी पर होगा कोई समझौता?

इंटरव्यू के दौरान मुख्यमंत्री से दोबारा सीधा सवाल किया गया कि क्या सरकार शराबबंदी कानून को लेकर किसी तरह के समझौते या बदलाव पर विचार कर रही है? इस पर सम्राट चौधरी ने बिल्कुल स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल शराबबंदी को लेकर किसी तरह का समझौता करने का सरकार का कोई विचार नहीं है।

यानी शराबबंदी को लेकर सरकार का रुख फिलहाल पहले की तरह ही सख्त रहने वाला है। सरकार के सामने एक तरफ अवैध शराब की बिक्री और जहरीली शराब की चुनौती है, तो दूसरी तरफ शराबबंदी को लेकर महिलाओं का समर्थन और सामाजिक प्रभाव भी बड़ा मुद्दा है।

10 साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल

बिहार में शराबबंदी को लागू हुए करीब 10 साल होने जा रहे हैं। इस दौरान सरकार ने शराब की बिक्री, निर्माण और तस्करी रोकने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई की है। इसके बावजूद यह सवाल लगातार बना हुआ है कि आखिर शराब की उपलब्धता को पूरी तरह कैसे रोका जाए।

मुख्यमंत्री के बयान से इतना जरूर साफ है कि सरकार शराबबंदी को समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। आर्थिक नुकसान के बावजूद सरकार इसे जारी रखने का फैसला कर चुकी है। अब असली चुनौती शराबबंदी के कानून को सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर पूरी तरह प्रभावी बनाने की है। जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर रोक, शराब की तस्करी पर लगाम और अवैध कारोबार के नेटवर्क को तोड़ना सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान ने एक बात स्पष्ट कर दी है—बिहार में शराबबंदी पर फिलहाल कोई समझौता नहीं होगा। सरकार के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान बड़ा मुद्दा जरूर है, लेकिन महिलाओं के सम्मान और उनके समर्थन को उससे भी ऊपर रखा जा रहा है।