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माओवादी हिंसा के जख्म भरने की तैयारी में सरकार, बिहार के 337 पीड़ित परिवारों की तलाश; मिलेगा मुआवजा

Bihar News: बिहार सरकार ने माओवादी हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के 337 पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने की कवायद तेज कर दी है। इसके लिए राज्य के 24 जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है और ऐसे परिवारों की पहचान की जा रही है जिन्हें अब तक सरकारी सहायता...

माओवादी हिंसा के जख्म भरने की तैयारी में सरकार, बिहार के 337 पीड़ित परिवारों की तलाश; मिलेगा मुआवजा
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार में माओवादी हिंसा भले ही अब अतीत की बात बन चुकी हो, लेकिन इसके जख्म आज भी सैकड़ों परिवारों के दिलों में ताजा हैं। अब सरकार उन परिवारों तक पहुंचने की कोशिश में जुट गई है, जिन्होंने वर्षों पहले नक्सली हिंसा में अपने अपनों को खो दिया था। राज्य सरकार ने ऐसे 337 पीड़ित परिवारों की पहचान कर उन्हें मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।


गृह विभाग ने इस संबंध में बिहार के 24 जिलों के जिलाधिकारियों (DM) से रिपोर्ट मांगी है। विभाग यह जानना चाहता है कि किन परिवारों को अब तक मुआवजा मिल चुका है और कौन अब भी सरकारी सहायता से वंचित हैं। जिन पात्र परिवारों को सहायता राशि नहीं मिली है, उनके लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया है।


गृह विभाग द्वारा जारी सूची में सबसे अधिक पीड़ित परिवार जमुई, गया और औरंगाबाद जिलों से हैं। जमुई में 88, गया में 60 और औरंगाबाद में 49 परिवारों को सूचीबद्ध किया गया है। इसके अलावा मुंगेर, लखीसराय, शिवहर, पूर्वी चंपारण, रोहतास और अन्य जिलों के परिवार भी शामिल हैं।


मुजफ्फरपुर जिले के सात परिवारों का भी नाम सूची में है, जिनके परिजन वर्षों पहले माओवादी हमलों में मारे गए थे। अब सरकार इन सभी मामलों की समीक्षा कर रही है ताकि कोई भी पात्र परिवार सहायता से वंचित न रह जाए।


गृह विभाग के संयुक्त सचिव की ओर से सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि आतंकवादी, सांप्रदायिक और नक्सली हिंसा के नागरिक पीड़ितों को सहायता प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की योजना (CSACV) के तहत मुआवजा राशि दी जाती है।


जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में सूचीबद्ध परिवारों की स्थिति की समीक्षा करें। यदि किसी परिवार को अब तक सहायता नहीं मिली है तो उसकी पात्रता की जांच कर प्रस्ताव केंद्र और राज्य सरकार को भेजें, ताकि उन्हें जल्द मुआवजा उपलब्ध कराया जा सके।


माओवादी हिंसा ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी थी। 23 अप्रैल 2009 को मुजफ्फरपुर के देवरिया थाना क्षेत्र में माओवादियों ने केन बम विस्फोट कर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह समेत पांच पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।


इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। बड़े बेटे को नौकरी मिल गई, लेकिन छोटे बेटे का भविष्य भटकाव में गुजरता रहा। पत्नी गुड्डी देवी भी पति की मौत के सदमे से कभी उबर नहीं सकीं और कुछ वर्ष पहले उनका भी निधन हो गया। परिवार आज भी उस दर्द को भूल नहीं पाया है।


देवरिया थाना क्षेत्र के ही सामाजिक कार्यकर्ता रामचंद्र सिंह उर्फ भोला सिंह की भी माओवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनके बेटे विवेक बताते हैं कि पिता की मौत के बाद पूरा परिवार संकट में आ गया था। सरकार से मिली सहायता राशि मां के इलाज में खर्च हो गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।


विवेक कहते हैं कि पिता के जाने के बाद मां भी लंबे समय तक बीमार रहीं और तीन साल पहले उनका भी निधन हो गया। आज दोनों भाई खेती और छोटे व्यवसाय के सहारे परिवार चला रहे हैं, लेकिन पिता की कमी कभी पूरी नहीं हो सकी।


सरकार की यह पहल उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है, जो वर्षों से सहायता और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि माओवादी हिंसा में प्रभावित किसी भी पात्र परिवार को सहायता से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।