Bihar teacher : बिहार के सरकारी विद्यालयों में अब नए मानक के अनुसार शिक्षकों की संख्या तय की जाएगी। शिक्षा विभाग ने राज्य के करीब 80 हजार सरकारी स्कूलों से विषयवार शिक्षकों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस प्रक्रिया के तहत सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों से शिक्षकों का डाटा एकत्र कर शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपडेट कराएं। इससे राज्य में शिक्षकों की वास्तविक जरूरत और कमी का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा।
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए नए मानक के अनुसार अब पहली से पांचवीं कक्षा तक चलने वाले प्राथमिक विद्यालयों में सामान्य रूप से चार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यदि विद्यालय में छात्रों की संख्या अधिक होती है तो प्रत्येक 35 विद्यार्थियों पर एक अतिरिक्त शिक्षक देने का प्रावधान किया गया है। विभाग का मानना है कि इससे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा और शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात संतुलित रहेगा।
इसी प्रकार छठी से आठवीं कक्षा तक संचालित मध्य विद्यालयों के लिए न्यूनतम तीन शिक्षकों का मानक निर्धारित किया गया है। वहीं माध्यमिक विद्यालयों में नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए अधिकतम आठ शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। विभाग ने उत्क्रमित और नवस्थापित विद्यालयों के लिए भी अलग मानक तय किया है, जहां अधिकतम छह शिक्षक पदस्थापित किए जा सकेंगे। इन विद्यालयों में सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, भाषा, संगीत और शारीरिक शिक्षा के लिए अलग-अलग पद निर्धारित किए गए हैं।
उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए भी विषयवार शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। विज्ञान, कला, भाषा, वाणिज्य, कंप्यूटर और संगीत जैसे संकायों के लिए अलग-अलग शिक्षक मानक तय किए गए हैं। राजकीय और प्रोजेक्ट विद्यालयों में अधिकतम 16 शिक्षकों की नियुक्ति का प्रावधान रखा गया है, जबकि उत्क्रमित और नवस्थापित उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अधिकतम 14 शिक्षक पदस्थापित किए जा सकेंगे।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त शिक्षकों की मांग अब तय शर्तों के आधार पर ही स्वीकार की जाएगी। यदि किसी विद्यालय में पहले से किसी विषय का शिक्षक कार्यरत है, तो उसी विषय में अतिरिक्त पद की स्वीकृति नहीं दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी स्कूल में पहले से संगीत शिक्षक मौजूद हैं, तो उसी विषय में दूसरा पद नहीं मिलेगा। इसी तरह भाषा समूह में भी निर्धारित संख्या से अधिक शिक्षकों की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है ताकि जिन विद्यालयों में वास्तव में शिक्षकों की कमी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शिक्षक उपलब्ध कराए जा सकें। नए मानक के अनुसार प्रत्येक विद्यालय में स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षक और आवश्यक शिक्षकों की संख्या का पूरा डाटा तैयार किया जाएगा।
इसके लिए शिक्षा कोष पोर्टल पर डाटा इंट्री की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सभी विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द अपनी जानकारी अपडेट करें। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से राज्य में शिक्षकों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और भविष्य में नियुक्ति, स्थानांतरण तथा पदस्थापन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सकेगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार को यह पता चल सकेगा कि किस जिले और किस विद्यालय में कितने शिक्षकों की आवश्यकता है। इससे शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में जल्द नियुक्ति की योजना तैयार की जा सकेगी और छात्रों की पढ़ाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।





