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बिहार में कहीं दंगा, फसाद, जाम हुआ तो 20 मिनट में पहुंचेगी पुलिस: हर जिले में Anti Riot Force बनाने का फैसला

बिहार में दंगा, हिंसक प्रदर्शन, सांप्रदायिक तनाव और सड़क जाम जैसी स्थिति से निपटने के लिए हर जिले और अनुमंडल स्तर पर District Anti Riot Force (DARF) बनाने का फैसला लिया गया है। सूचना मिलते ही टीम को 20 मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना किया जाएगा।

बिहार में कहीं दंगा, फसाद, जाम हुआ तो 20 मिनट में पहुंचेगी पुलिस: हर जिले में Anti Riot Force बनाने का फैसला
Tejpratap
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6 मिनट

पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील परिस्थितियों, हिंसक प्रदर्शन, सांप्रदायिक तनाव, सड़क जाम और सरकारी संपत्ति पर हमले जैसी घटनाओं से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सभी जिलों और अनुमंडल स्तर पर District Anti Riot Force (DARF) यानी जिला दंगा-निरोधी बल का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसी भी दंगा या हिंसक स्थिति में पुलिस की त्वरित और संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। 


हर जिले में होगी विशेष Riot Control Unit

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, राज्य के प्रत्येक जिले और अनुमंडल स्तर पर Riot Control Unit का गठन किया जा रहा है। यह यूनिट कानून-व्यवस्था की संवेदनशील स्थिति, सांप्रदायिक तनाव, हिंसक प्रदर्शन, सड़क जाम, सरकारी संपत्ति पर हमले, भीड़ नियंत्रण और अन्य आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष रूप से तैयार रहेगी।


ट्रेंड पुलिसकर्मी तैनात होंगे

DARF में अलग-अलग भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को शामिल किया जाएगा। इसमें प्रभारी पदाधिकारी, प्रशिक्षित पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मी, प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी, जरूरत पड़ने पर चिकित्सा एवं एंबुलेंस सहायता दल, वीडियोग्राफी एवं दस्तावेजीकरण के लिए नामित कर्मी, संचार एवं रिजर्व बल तथा लाठी दस्ते के जवान शामिल होंगे।


एक कंपनी में होंगे 3 प्लाटून, 47 जवान

पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, प्रत्येक दंगा-निरोधी दस्ते की एक कंपनी में तीन प्लाटून होंगे। प्रत्येक प्लाटून में आंसू गैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक और वायरलेस ऑपरेटर सहित कुल 47 जवान होंगे। प्रत्येक प्लाटून के साथ दो वाहन भी उपलब्ध रहेंगे। इनमें एक बस और एक ट्रक शामिल होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य बल को जरूरत पड़ने पर तेजी से घटनास्थल तक पहुंचाना और वहां आवश्यक उपकरण एवं जवानों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।


जिलों को तीन ग्रुप में बांटा गया

बिहार के सभी जिलों को तीन श्रेणियों, A, B और C, में वर्गीकृत करते हुए कुल 49 कंपनियों के दंगा-निरोधी दस्ते गठित किए जाएंगे। इनके लिए कुल 294 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। श्रेणी A में पटना को तीन कंपनियां और 18 वाहन दिए जाएंगे। वहीं गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और बेगूसराय को दो-दो कंपनियां तथा 12-12 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।


श्रेणी B में नालंदा, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, वैशाली, सीतामढ़ी, सिवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, बांका, मुंगेर, जमुई और खगड़िया को एक-एक कंपनी तथा छह-छह वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। श्रेणी C में अरवल, शिवहर, बगहा, लखीसराय, शेखपुरा और नवगछिया को एक-एक प्लाटून तथा दो-दो वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।


सूचना मिलते ही 20 मिनट में रवाना होगी टीम

DARF की सबसे अहम विशेषताओं में से एक इसका त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम होगा। पुलिस मुख्यालय के निर्देश के मुताबिक, दंगा या हिंसक स्थिति की सूचना मिलते ही जिला नियंत्रण कक्ष द्वारा तत्काल सूचना प्रसारित की जाएगी। इसके बाद दंगा-निरोधी दस्ते को 20 मिनट के भीतर निर्धारित घटनास्थल के लिए रवाना किया जाएगा। घटनास्थल पर पहुंचने के बाद DARF स्थानीय वरीय पुलिस पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करेगा। टीम लगातार स्थिति का आकलन करेगी और परिस्थितियों के अनुसार नियमानुकूल कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।


एक महीने की विशेष ट्रेनिंग

पुलिस मुख्यालय ने DARF में शामिल होने वाले जवानों के प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया है। प्रत्येक जिले के पुलिस केंद्र में दंगा-निरोधी दस्ते के लिए एक महीने का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षकों का चयन पुलिस अधिकारियों के बीच से किया जाएगा। चयनित प्रशिक्षकों को Rapid Action Force Academy for Public Order (RAPO), मेरठ में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद ये प्रशिक्षक अपने-अपने जिलों में DARF के लिए चयनित पदाधिकारियों और जवानों को विशेष प्रशिक्षण देंगे।


हर तीन महीने में होगी रिफ्रेशर ट्रेनिंग

सिर्फ प्रारंभिक प्रशिक्षण तक ही व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, प्रत्येक तीन महीने में हर प्लाटून के लिए एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया जाएगा। यह Rotational Training के तहत पुलिस केंद्र में पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) के नेतृत्व में कराया जाएगा। इसका उद्देश्य दंगा नियंत्रण से जुड़ी तकनीकों, उपकरणों और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को लेकर जवानों की तैयारी लगातार बनाए रखना है।


तैनाती और संसाधनों की जिम्मेदारी तय

दस्ता प्रभारी को अपने अधीन बल की तैनाती, अनुशासन, संचार व्यवस्था, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड के लिए जिम्मेदार बनाया जाएगा। वहीं पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) इसके प्रभारी की भूमिका में रहेंगे।वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक को जिला दंगा-निरोधी बल के लिए प्रशिक्षण, साजो-सामान, उपकरण और आवासन आदि की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा सभी क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक DARF से जुड़े कार्यों की निगरानी करेंगे।


क्यों महत्वपूर्ण है यह व्यवस्था?

बिहार में बड़े राजनीतिक प्रदर्शन, जुलूस, भीड़ जुटने वाले कार्यक्रम, सांप्रदायिक तनाव या हिंसक घटनाओं के दौरान स्थानीय पुलिस पर अचानक अतिरिक्त दबाव बन सकता है। ऐसे समय में प्रशिक्षित और विशेष रूप से सुसज्जित बल की त्वरित उपलब्धता कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नई व्यवस्था के तहत DARF को पहले से संगठित, प्रशिक्षित और आवश्यक वाहनों एवं संसाधनों से लैस रखा जाएगा। 20 मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना करने का लक्ष्य इसे सामान्य पुलिस व्यवस्था से अलग एक त्वरित प्रतिक्रिया बल के रूप में स्थापित करता है।