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Bihar BJP : डिजिटल इंडिया में फोटो ही पुरानी! BJP पोस्टर ने खोल दी संगठन की पोल? नितीन नवीन की जगह पार्टी दफ्तर के कार्यक्रम में नड्डा की फोटो, अब होगा एक्शन ?

बिहार बीजेपी के एक पोस्टर में बड़ी गलती सामने आई, जिसमें नितिन नवीन की जगह जेपी नड्डा की तस्वीर लग गई। इस चूक के बाद सियासी हलचल और सोशल मीडिया पर तंज तेज हो गए।

Bihar BJP : डिजिटल इंडिया में फोटो ही पुरानी! BJP पोस्टर ने खोल दी संगठन की पोल? नितीन नवीन की जगह पार्टी दफ्तर के कार्यक्रम में नड्डा की फोटो, अब होगा एक्शन ?
Tejpratap
Tejpratap
3 मिनट

बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी तंज और सोशल मीडिया की हलचल ने नया रंग पकड़ लिया है। इस बार चर्चा का केंद्र कोई बड़ा आंदोलन या चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक साधारण सी तस्वीर बन गई है।


भारतीय जनता पार्टी भारतीय जनता पार्टी द्वारा आंबेडकर जयंती को लेकर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम से ठीक पहले एक प्रेस वार्ता बुलाई गई। इस प्रेस वार्ता को लेकर जो पोस्टर और तस्वीर जारी की गई, उसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की जगह पार्टी के नेता जेपी नड्डा की तस्वीर लगा दी गई।


इसके बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या बिहार भाजपा के नेताओं को यह भी पता नहीं कि पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व बदल चुका है, या फिर यह केवल एक बड़ी लापरवाही है। जबकि भाजपा हमेशा अपने अनुशासन के लिए पहचानी जाने वाली पार्टी रही है, जहां हर कार्यक्रम की रूपरेखा पहले से तय होती है और जिम्मेदारियां स्पष्ट होती हैं। ऐसे में इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई, यह सवाल उठ रहा है।


वहीं, इस घटना के बाद पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पुराने पोस्टर और तस्वीरों का उपयोग संगठनात्मक ढील और लापरवाही को दर्शाता है। उनका कहना है कि आज डिजिटल इंडिया के दौर में अगर फोटो तक अपडेट नहीं हो पा रहे हैं, तो यह गंभीर संगठनात्मक सवाल है।


गौरतलब है कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए यह जरूरी होता है कि उसके सभी कार्यक्रम, बैनर और पोस्टर समय के साथ अपडेट रहें, क्योंकि यही उसकी संगठनात्मक मजबूती का प्रतीक होता है। जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर मीम्स और तंज की बाढ़ आ गई। किसी ने लिखा— “लगता है अपडेट करने का बटन दबाना रह गया”, तो किसी ने कहा— “यह डिजिटल नहीं, डिफरेंट इंडिया है।” वहीं कुछ यूजर्स ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में लेते हुए कहा कि राजनीति में पोस्टर बदलने में कभी-कभी समय लग जाता है।


कुल मिलाकर यह मामला जितना प्रशासनिक चूक का है, उतना ही राजनीतिक तंज का भी हिस्सा बन गया है। अब देखना यह होगा कि क्या पार्टी संगठन इस पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करता है या फिर यह मामला भी बिहार की राजनीति के उन छोटे विवादों में शामिल हो जाएगा, जो कुछ दिनों बाद शांत हो जाते हैं।