1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Thu, 26 Feb 2026 09:57:15 AM IST
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Bihar Bhumi: बिहार में लंबित का बड़ा खेल चलता है. राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी लंबित का बहाना बनाकर जमीन का दाखिल खारिज व अन्य कार्य लटका देते हैं. जिससे रैयतों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में सरकार ने एक बार स्थिति स्पष्ट करते हुए सभी समाहर्ताओं,डीसीएलआर और अंचल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने साफ कर दिया है कि स्टे ऑर्डर वाले मामले ही लंबित माने जाएंगे.
सक्षम न्यायालय से स्टे ऑर्डर को ही लंबित माना जायेगा...
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार ने बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 एवं नियमावली, 2010 के अंतर्गत ‘लंबित’ मामलों की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं एवं उप समाहर्ताओं (भूमि सुधार) को वादों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया है।प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सभी वादों का निष्पादन तीन माह के भीतर करना अनिवार्य है। ‘लंबित’ का अर्थ केवल वही मामले होंगे, जिनमें सक्षम न्यायालय द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा (Stay Order/Temporary Injunction) जारी हो।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सक्षम प्राधिकार एवं अपीलीय प्राधिकार को मामलों का निष्पादन संक्षिप्त प्रक्रिया (Summary Disposal) के तहत करना है। समाहर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर अधिकतम तीन माह के भीतर वादों के निष्पादन को सुनिश्चित करें।
उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भूमि विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। भूमि विवाद के मामलों का त्वरित गति से निष्पादन के उद्देश्य से लंबित की परिभाषा स्पष्ट की गई है। यह पहल माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के सात निश्चय कार्यक्रम (2025-30) के अंतर्गत ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।