1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 25 Feb 2026 01:11:01 PM IST
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Bihar News : बिहार विधान परिषद में आज एक अहम सवाल उठाया गया जिसमें जहानाबाद जिले के बराबर पहाड़ स्थित शिव मंदिर और वहां पर्यटन विकास की योजनाओं पर चर्चा हुई। एमएलसी कुमार नगेंद्र ने सदन में कहा कि इस स्थान को विकसित करने के लिए वर्ष 2011 में ही रोपवे निर्माण की मंजूरी दी गई थी। इसके साथ ही यहां गेस्ट हाउस बनाने की योजना भी स्वीकृत हुई थी।
लेकिन सवाल यह है कि 14 वर्षों के बाद भी न तो रोपवे का निर्माण हुआ है और न ही गेस्ट हाउस का काम पूरा हो सका। एमएलसी कुमार नगेंद्र ने सदन को बताया कि गेस्ट हाउस केवल आंशिक रूप से ही उपलब्ध कराया गया है, जबकि पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए वहां कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि बराबर पहाड़ी तक जाने के रास्ते में न तो सीडीओ का निर्माण किया गया है और न ही महिलाओं की सुरक्षा का कोई ठोस प्रबंध है।
एमएलसी ने यह भी कहा कि मंदिर तक पहुंचने के रास्ते में शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। इस स्थिति के चलते महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालु मंदिर तक जाने में कई कठिनाइयों का सामना करते हैं। उन्होंने पर्यटन विभाग और राज्य सरकार से मांग की कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल को विकसित करने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं।
इस पर पर्यटन विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने जवाब दिया कि उन्हें इस बात की पूरी जानकारी नहीं है कि अब तक रोपवे और गेस्ट हाउस का निर्माण क्यों नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि जो जानकारी उन्हें मिली है उसके अनुसार रोपवे निर्माण का कार्य पूर्णत: निर्माण विभाग के अधीन है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर निर्माण कार्य नहीं हुआ है तो वे इसकी समीक्षा करवा लेंगे और यह पता लगाएंगे कि निर्माण में देरी क्यों हो रही है।
सदन में एमएलसी डॉक्टर राजवर्धन सिंह आजाद ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भी इस तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो मंत्री केवल “समीक्षा करवा लेंगे” का ही जवाब देते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि ऐसे मामलों पर मंत्री पहले क्यों नहीं ध्यान देते। क्या उन्हें मामलों की जानकारी नहीं होती या फिर मुद्दों को अनदेखा किया जाता है।
बराबर पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर का धार्मिक और पर्यटन दृष्टिकोण से काफी महत्व है। 14 वर्षों से रोपवे निर्माण न होने और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशान किया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मानें तो यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे सकती थी बल्कि रोजगार और स्थानीय विकास में भी योगदान देती।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि बराबर पहाड़ी जैसी जगहों को विकसित करने में अगर समय रहते योजना और क्रियान्वयन का ध्यान रखा जाता तो आज वहां पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होती। रोपवे का निर्माण न केवल यात्रा को आसान बनाएगा बल्कि मंदिर तक पहुंचने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ा सकता है।
मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने सदन को आश्वासन दिया कि वे मामले की समीक्षा करेंगे और निर्माण में देरी के कारणों को स्पष्ट करेंगे। हालांकि, एमएलसी और स्थानीय लोगों का कहना है कि समीक्षा ही पर्याप्त नहीं है, अब वास्तविक कार्रवाई की जरूरत है ताकि 14 साल से लंबित परियोजना को जल्द पूरा किया जा सके।
बराबर पहाड़ी के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिहार में पर्यटन विकास और धार्मिक स्थलों के संवर्द्धन के लिए योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन और निगरानी पर्याप्त नहीं होती। स्थानीय स्तर पर जागरूकता और सरकारी जवाबदेही के अभाव में ऐसी परियोजनाएं सालों तक अधूरी रह जाती हैं।
इसलिए अब सवाल यह है कि क्या मंत्री की समीक्षा के बाद कार्रवाई होगी या यह मामला भी केवल कागजों तक ही सीमित रहेगा। प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं की उम्मीद है कि जल्द ही बराबर पहाड़ी पर रोपवे का निर्माण और अन्य सुविधाएं पूरी होंगी, ताकि यह धार्मिक और पर्यटन स्थल अपनी पहचान बना सके।