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Bihar News : साहित्य के मंच से बड़ा संदेश! बिहार के 63 हिन्दी-सेवियों को मिला ‘प्रधानमंत्री साहित्यकार गौरव सम्मान’, मंत्री ने कहा - 2047 तक भारत बनेगा विश्व की महाशक्ति

पटना में आयोजित समारोह में बिहार के 63 हिन्दी-सेवियों को ‘प्रधानमंत्री साहित्यकार गौरव सम्मान’ से नवाजा गया। कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि 2047 तक भारत विश्व की महाशक्ति बनकर ‘विश्व-गुरु’ का स्थान फिर हासिल करेगा।

Bihar News : साहित्य के मंच से बड़ा संदेश! बिहार के 63 हिन्दी-सेवियों को मिला ‘प्रधानमंत्री साहित्यकार गौरव सम्मान’, मंत्री ने कहा - 2047 तक भारत बनेगा विश्व की महाशक्ति
Tejpratap
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Bihar News : पटना में आयोजित एक विशेष साहित्यिक समारोह में बिहार के 63 हिन्दी-सेवियों को ‘प्रधानमंत्री साहित्यकार गौरव सम्मान’ से विभूषित किया गया। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और विकसित भारत के निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन ‘एडूकेशनल रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट संस्थान’ के तत्वावधान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म-दिवस संकल्प समारोह के रूप में किया गया।


समारोह का उद्घाटन बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक, जब देश अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, भारत विश्व की महाशक्ति के रूप में स्थापित होगा और अपने प्राचीन ‘विश्व-गुरु’ के स्थान को फिर से प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में साहित्यकारों और रचनाकारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि साहित्य समाज को दिशा देने और नई पीढ़ी में विचार एवं संस्कार विकसित करने का काम करता है।


मंत्री ने सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि में कला और साहित्य को विशेष प्राथमिकता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में देश की विभिन्न भाषाओं के कवियों और साहित्यकारों को भी विशिष्ट सम्मान से अलंकृत किया गया है। उनके मुताबिक साहित्य और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ समाज को जोड़ने का काम करते हैं।


कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने की। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति की मूल भावना ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की दृष्टि हमेशा से पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की रही है। भारतीय परंपरा केवल मानव समाज ही नहीं, बल्कि प्राणी मात्र के प्रति प्रेम और करुणा का संदेश देती है।


डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि भारत की इसी ज्ञान और संस्कृति की परंपरा ने कभी उसे विश्व में गुरु का स्थान दिलाया था। उनका कहना था कि जब देश अपनी भाषा, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से दूर हुआ तो उसका प्रभाव भी कमजोर हुआ। अब भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की ओर लौटने की कोशिश हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि अपनी जड़ों से जुड़कर भारत फिर से दुनिया को ज्ञान और मानवता का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


समारोह में व्यापार आयोग, बिहार के अध्यक्ष सुरेश रुंगटा, भारतीय चिकित्सा संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सहजानन्द प्रसाद सिंह, सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी, उद्योगपति एवं साहित्यकार राकेश मिश्र, ईं. अशोक कुमार, जय शंकर शर्मा, सुनील कुमार सिन्हा, नित्यानंद शर्मा, भानू प्रताप सिंह, नरेश महतो, अशोक पाठक और सुंदर कांत चौधरी ने भी अपने विचार रखे।


आयोजकों के अनुसार सम्मान समारोह का उद्देश्य हिन्दी भाषा, साहित्य और समाज के लिए योगदान देने वाले रचनाकारों और हिन्दी-सेवियों को सम्मानित करना था। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार और पूर्व कुलपति अरविन्द कुमार, सुरेश रुंगटा, प्रो. शारदा चरण, उदय नारायण सिंह, भगवती प्रसाद द्विवेदी, भावना शेखर, राकेश मिश्र, आराधना प्रसाद, डॉ. पूनम आनन्द, डॉ. पुष्पा जमुआर, डॉ. सुधा सिन्हा, डॉ. विद्या चौधरी, संगीता मिश्र, कमल किशोर वर्मा ‘कमल’, सुजाता मिश्रा, डॉ. रेखा मिश्रा, डॉ. तलत परवीन, इन्दु उपाध्याय, शुभचंद्र सिन्हा, डॉ. एमके मधु और डॉ. सुमेधा पाठक समेत कई साहित्यकार मौजूद रहे।


इसके अलावा प्रीति सुमन, पं. गणेश झा, डॉ. ऋचा वर्मा, ईं. अशोक कुमार, बाँके बिहारी साव, डॉ. प्रतिभा रानी, जय प्रकाश पुजारी, श्रीकांत व्यास, डॉ. शालिनी पाण्डेय, डॉ. मनोज गोवर्धनपुरी, डॉ. सुषमा कुमारी, डॉ. अर्चना त्रिपाठी, ईं. आनन्द किशोर मिश्र, प्रो. दीपक कुमार, डॉ. पंकज प्रियम, अरुण कुमार श्रीवास्तव, दिनेश्वर लाल ‘दिव्यांशु’, संजय चेसियार, सिमरन सिंह, डॉ. मुनी कुमारी, नित्यानंद शर्मा, कल्पना सिंह, सुनीता रंजन और कृष्ण रंजन सिंह सहित अन्य हिन्दी-सेवियों को भी सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने हिन्दी भाषा के संरक्षण, साहित्य के विस्तार और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं का कहना था कि डिजिटल दौर में साहित्य के सामने नई चुनौतियां हैं, लेकिन तकनीक के माध्यम से हिन्दी को देश-दुनिया के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के अवसर भी बढ़े हैं।


समारोह में अतिथियों का स्वागत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. विनोद शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता डॉ. कौशलेन्द्र नारायण ने किया। मंच का संचालन जनार्दन शर्मा जोगी ने किया। कार्यक्रम में साहित्य और समाज से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही। 63 हिन्दी-सेवियों का सम्मान समारोह हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में योगदान को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करने वाला आयोजन रहा।