PK Biography : बिहार की राजधानी पटना की सबसे चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। शुरुआती रुझानों में प्रशांत किशोर ने बीजेपी के मजबूत किले माने जाने वाले बांकीपुर में बढ़त बनाकर बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब तक हुई 9 राउंड की गिनती में पीके को 17 हजार से ज्यादा वोट मिल चुके हैं और वह 5 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं। हालांकि अभी 31 राउंड की मतगणना बाकी है, इसलिए अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर बदल भी सकती है।
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रही है। इस सीट से नितिन नवीन लगातार कई चुनाव जीतते रहे हैं। इससे पहले उनके पिता भी यहां से विधायक रह चुके हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर की शुरुआती बढ़त ने न सिर्फ बीजेपी के लिए चुनौती खड़ी कर दी है, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए समीकरण की चर्चा भी शुरू हो गई है। इसी बीच लोग प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर के साथ-साथ उनके परिवार, गांव, शिक्षा और निजी जीवन के बारे में भी जानने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
रोहतास के कोनार गांव से निकले प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ था। आज भी उनके गांव में उनका पुश्तैनी दो मंजिला मकान मौजूद है। हालांकि उनका बचपन का बड़ा हिस्सा बक्सर में गुजरा। उनके पिता डॉ. श्रीकांत पांडेय सरकारी डॉक्टर थे। नौकरी के कारण उनका परिवार लंबे समय तक बक्सर और शाहपुर में रहा। बक्सर में भी उनका परिवार का घर है, जहां आज भी लोग रहते हैं और घर की देखभाल करते हैं। गांव से लेकर बक्सर तक प्रशांत किशोर का जुड़ाव बना हुआ है। हालांकि राजनीति में सक्रिय होने के बाद उनका ज्यादातर समय बिहार के अलग-अलग इलाकों में लोगों से मिलने और जन सुराज अभियान को मजबूत करने में गुजरता है।
पिता डॉक्टर, मां गृहिणी, भाई बिजनेस से जुड़े
प्रशांत किशोर के पिता डॉ. श्रीकांत पांडेय ने सरकारी डॉक्टर के तौर पर लंबे समय तक लोगों की सेवा की। उनकी मां गृहिणी रही हैं। परिवार के कई सदस्य सार्वजनिक जीवन से दूर रहते हैं। सार्वजनिक जानकारी के अनुसार प्रशांत किशोर के चार भाई-बहन हैं। उनके बड़े भाई अजय किशोर बिजनेस से जुड़े हुए हैं। परिवार के अन्य सदस्य अपनी निजी जिंदगी में रहते हैं और राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं।
डॉक्टर पत्नी जाह्नवी दास का मिला साथ
प्रशांत किशोर की पत्नी डॉ. जाह्नवी दास पेशे से डॉक्टर हैं। वह असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं। बताया जाता है कि दोनों की मुलाकात संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान हुई थी। पहले दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में यही रिश्ता शादी में बदल गया। प्रशांत किशोर और जाह्नवी दास का एक बेटा भी है। चुनावी हलफनामे में उनके बेटे का नाम दैबिक भारद्वाज बताया गया है। उनका बेटा आमतौर पर सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहता है।
प्रशांत किशोर कई बार सार्वजनिक मंचों से अपनी पत्नी के योगदान का जिक्र कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि बिहार की राजनीति में सक्रिय होकर काम करने के पीछे उनकी पत्नी का बड़ा सहयोग है। घर और परिवार की जिम्मेदारी संभालने की वजह से वह जनता के बीच जाकर ज्यादा समय दे पाते हैं।
पटना साइंस कॉलेज से पढ़ाई, फिर बने चुनावी रणनीतिकार
प्रशांत किशोर की शुरुआती शिक्षा बिहार में ही हुई। उन्होंने बक्सर में प्रारंभिक पढ़ाई की। इसके बाद पटना साइंस कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। आगे उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीबीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में काम किया और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े। इसी दौरान उन्होंने देश-विदेश में स्वास्थ्य और विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट पर काम किया।
बाद में प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाई। उन्होंने कई बड़े नेताओं और राजनीतिक दलों के चुनाव अभियानों में रणनीति तैयार की। 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के अभियान से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
इसके बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का फैसला किया और बिहार में जन सुराज अभियान की शुरुआत की। अब बांकीपुर उपचुनाव में उनकी बढ़त ने उन्हें सीधे चुनावी मैदान में एक बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करने की चर्चा तेज कर दी है।
बांकीपुर का मुकाबला क्यों बना खास?
बांकीपुर सीट पर बीजेपी की मजबूत पकड़ के बीच प्रशांत किशोर का आगे निकलना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। अगर वह इस बढ़त को जीत में बदलने में सफल होते हैं तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।हालांकि मतगणना अभी जारी है और अंतिम परिणाम आने में समय लगेगा। लेकिन इतना तय है कि बांकीपुर उपचुनाव ने प्रशांत किशोर को एक बार फिर बिहार की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





