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अब नहीं चलेगी स्कूलों की ‘जबरन खरीदारी’, डीएम का डंडा चला—किताब-यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की खुली छूट

Bihar News: पश्चिम चंपारण में निजी स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। नए आदेश के तहत अब अभिभावकों को किताबें और यूनिफॉर्म किसी तय दुकान से खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा, जिससे

अब नहीं चलेगी स्कूलों की ‘जबरन खरीदारी’, डीएम का डंडा चला—किताब-यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की खुली छूट
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है, जहां निजी स्कूलों की मनमानी पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि अब कोई भी निजी स्कूल बच्चों या उनके माता-पिता को किसी तय दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा।


समाहरणालय बेतिया की ओर से जारी इस आदेश में जिलाधिकारी सह जिला दंडाधिकारी तरोनजोत सिंह ने साफ कहा है कि जिले में कई निजी विद्यालय अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे थे। जांच में यह सामने आया कि स्कूल न सिर्फ एडमिशन, डेवलपमेंट और अन्य शुल्क के नाम पर ज्यादा पैसे वसूल रहे थे, बल्कि किताबों और यूनिफॉर्म के लिए खास दुकानों को अनिवार्य कर रहे थे। इससे अभिभावकों को महंगे दामों पर सामान खरीदना पड़ता था।


प्रशासन ने इस व्यवस्था को शिक्षा के मूल उद्देश्य के खिलाफ मानते हुए तुरंत प्रभाव से इस पर रोक लगा दी है। अब अभिभावकों को पूरी स्वतंत्रता होगी कि वे अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी दुकान से किताबें और यूनिफॉर्म खरीद सकें।


सिर्फ इतना ही नहीं, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी निजी स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपनी फीस स्ट्रक्चर, किताबों की लिस्ट, यूनिफॉर्म का विवरण और अन्य जरूरी जानकारियां स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करें। इससे अभिभावकों को पहले से ही पूरी जानकारी मिल सकेगी और किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी।


यूनिफॉर्म को लेकर भी अहम फैसला लिया गया है। अब स्कूल बार-बार यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर पाएंगे। एक बार तय की गई यूनिफॉर्म कम से कम तीन साल तक लागू रहेगी। इसके साथ ही छात्रों को पुरानी किताबों के इस्तेमाल के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे खर्च में कमी आ सके।


आदेश में यह भी साफ कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्हें भी अन्य छात्रों की तरह सभी सुविधाएं मिलेंगी।


स्कूलों की परिवहन व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। सभी स्कूल वाहनों में सीसीटीवी कैमरा और फर्स्ट एड किट अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


प्रशासन ने चेतावनी भी दी है कि अगर कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।