MUZAFFARPUR: बिहार के मुजफ्फरपुर में आय से अधिक संपत्ति के मामले में विशेष निगरानी कोर्ट ने तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी को पांच साल की सजा सुनाई है। अदालत ने विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए उन पर कुल 16 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह फैसला 26 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर के विशेष न्यायाधीश जस्टिस सुमन कुमार दिवाकर ने सुनाया। बेबी कुमारी मुजफ्फरपुर जिला बल में महिला सिपाही संख्या 824 के पद पर तैनात थीं। अदालत ने उन्हें 5 अक्टूबर 2026 को दोषी करार दिया था।
35.42 लाख रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी के खिलाफ 35 लाख 42 हजार 955 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। यह कार्रवाई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र के पुलिस निरीक्षक मदन प्रसाद सिंह की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई थी।
इस मामले में निगरानी थाना कांड संख्या 27/2012 और विशेष वाद संख्या 12/2012 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई हुई।
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई) के साथ धारा 13(2) के तहत पांच साल की कैद और 7.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा, भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत भी पांच साल की कैद और 7.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
वहीं, धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के तहत प्रत्येक धारा में तीन-तीन साल की कैद और 25-25 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया।
जुर्माना जमा नहीं करने पर संबंधित धाराओं के तहत अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। विजिलेंस कोर्ट ने 16 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया।
11 गवाहों की हुई गवाही
मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के वरीय पुलिस उपाधीक्षक अश्विनी कुमार ने आरोप-पत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों की गवाही कराई गई। बिहार सरकार की ओर से प्रभारी विशेष लोक अभियोजक कृष्ण देव साह ने मामले में पैरवी की।
2026 में भ्रष्टाचार के 22 मामलों में दोषसिद्धि
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े 22 मामलों में लोक सेवकों को अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है। ब्यूरो ने बताया कि झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद वर्ष 2000 से 2024 तक के 25 वर्षों में औसतन हर साल 5.6 मामलों में सजा हुई थी। ब्यूरो के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक हुई दोषसिद्धि इस औसत से करीब 293 प्रतिशत अधिक है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की कार्रवाई लगातार जारी है।





