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स्वास्थ्य के लिए 13 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट, अस्पताल में मौत के बाद शव ले जाने के लिए भटकते रहे परिजन

MUZAFFAPUR : सोमवार को विधानसभा में सरकार की तरफ से 2 लाख 18000 करोड़ से ज्यादा का बजट सदन में पेश किया गया। जिस वक्त वित्त मंत्री तार किशोर प्रसाद स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों और

स्वास्थ्य के लिए 13 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट, अस्पताल में मौत के बाद शव ले जाने के लिए भटकते रहे परिजन
Santosh Singh
3 मिनट

MUZAFFAPUR : सोमवार को विधानसभा में सरकार की तरफ से 2 लाख 18000 करोड़ से ज्यादा का बजट सदन में पेश किया गया। जिस वक्त वित्त मंत्री तार किशोर प्रसाद स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों और भविष्य के कार्य योजना की चर्चा कर रहे थे। सदन में यह बता रहे थे कि स्वास्थ्य महकमे पर बिहार सरकार 13 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च करने वाली है। उसी वक्त बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का सामना मुजफ्फरपुर में एक परिवार कर रहा था। मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई। परिजन शव को घर ले जाने के लिए वाहन की तलाश में घंटों भटकते रहे। आखिरकार जब कोई नतीजा नहीं निकला तो भाड़े पर ई रिक्शा ठीक किया और किसी तरह गोद में उठाए शव को लेकर ई-रिक्शा तक पहुंच गए। 


बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार चाहे लाख दावे करती हो लेकिन जमीनी हकीकत क्या है इसकी तस्वीर समय-समय पर सामने आते रहती है। सोमवार को मुजफ्फरपुर के साथ पूरा की रहने वाली राजू देवी को लेकर उनके परिजन मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचे थे। इलाज के दौरान डॉ एमएम कमाल ने महिला को मृत घोषित कर दिया। परिजन इसके बाद शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल के उपाधीक्षक कार्यालय से लेकर कंट्रोल रूम तक का चक्कर लगाते रहे लेकिन शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। परिजन कमल शाह के मुताबिक अस्पताल में शव वाहन के लिए वह घंटों मिन्नत आरजू करते रहे लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। कंट्रोल रूम और उपाधीक्षक के कार्यालय के सामने भी गुहार लगाया लेकिन शव वाहन नहीं मिला। आखिरकार किसी तरह भाड़े पर एक ई रिक्शा वाला शव ले जाने को तैयार हुआ और राजो देवी का शव लेकर परिजन घर जा पाए। 


महिला की मौत के बाद परिजनों को शव वाहन मुहैया नहीं कराए जाने के मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि राजो देवी को दोपहर 3:30 बजे अस्पताल में लाया गया था और उसके बाद उसकी मौत हो गई। इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र आलोक में जानकारी नहीं मिलने की बात कही है हालांकि उन्होंने प्रबंधक से रिपोर्ट तलब की है। शव के लिए वाहन उपलब्ध नहीं मुहैया कराना सरकार के फैसले पर तमाचा है। सिविल सर्जन ने कहा है कि इस मामले में जिसकी भी लापरवाही होगी उसके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। उधर अस्पताल के उपाधीक्षक का कहना है कि शव वाहन खराब है और 3 दिनों से उसकी रिपेयरिंग हो रही है। उन्होंने वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट देने की बात कही है।