1st Bihar Published by: First Bihar Updated Tue, 24 Feb 2026 04:44:56 PM IST
'तू डाल डाल, तो मैं पात पात' - फ़ोटो सोशल मीडिया
KATIHAR:बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हुए 10 साल हो गये हैं, लेकिन शराब के धंधेबाज आज भी अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं। शराब तस्करी के ये तरह-तरह के हथकंडा अपना पुलिस को सीधी चुनौती दे रहे हैं। कभी ट्रक या अन्य वाहनों में तहखाना बनाकर शराब की तस्करी करते हैं तो कभी एम्बुलेंस और पेट्रोल टैंक या सिलेंडर में छिपाकर बिहार में शराब लाते हैं। ये लोग तो कब्रिस्तान और श्मशान घाट तक को नहीं छोड़ रहे हैं। वहां भी धंधेबाज शराब की खेप छिपाने का काम करते हैं। इस तरह के मामले कई बार सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है।
इस बार शराब की तस्करी के लिए ट्रेन को चुना गया है। जिसे देखकर यही कहा जा सकता है कि धंधेबाज पुलिस से शायद यह कहना चाहता है कि तू डाल-डाल तो मैं पात-पात..शराब के धंधेबाजों ने ट्रेन के निचले हिस्से यानि बोगी के नीचे बने चैंपर को शराब तस्करी का ठिकाना बनाया। जिसे देखकर जीआरपी और आरपीएफ वालों की आंखें फटी की फटी रह गयी। ट्रेन की बोगी के नीचे बने चैंबर में छिपाकर शराब बिहार में लाने की गुप्त सूचना उत्पाद विभाग को किसी ने दे दी। फिर क्या था उत्पाद विभाग की टीम ने जब ट्रेन के निचले हिस्से को खंगाला तो उसमें से भारी मात्रा में विदेशी शराब की बोतलें बरामद हुई। जिसे देखकर यात्री भी कहने लगे कि बिहार में शराबबंदी लागू हुए एक दशक बीत चुके हैं लेकिन तस्करों के दिमाग की बत्ती बुझने का नाम नहीं ले रही है। बोगी के नीचे बने चैंबर से 83 लीटर शराब बरामद किया गया।
इस पूरी कार्रवाई का हीरो बना वो होमगार्ड का जवान, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना ट्रेन के नीचे घुसकर शराब की एक-एक बोतल को खोजकर बाहर निकाला। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में होमगार्ड जवान जिस तरह ट्रेन के संकरे और खतरनाक हिस्सों में रेंगते हुए शराब बरामद कर रहा है, उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। ट्रेन के निचले हिस्से से बरामद शराब को होली में खपाने के उद्धेश्य से लाया गया था। लेकिन किसी ने इसकी गुप्त सूचना पुलिस को दे दी फिर क्या था होली की तैयारी पर पानी फिर गया। ट्रेन की बोगी के नीचे से निकल रहे विदेशी शराब की बोतलों को देखकर खुद पुलिस भी दंग रह गयी।
शराब तस्कर आए दिन नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं, हर बार की तरह इस बार भी उनका यह हथकंडा कामयाब नहीं हो सका। यह मामला सामने आने के बाद अब हर ट्रेनों की बोगी के निचले हिस्से की तलाशी ली जा रही है। पुलिस की इस कार्रवाई से शराब तस्करों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। होली में पैसा कमाने के प्लान पर पुलिस ने पानी फेर दिया है। शराबबंदी वाले राज्य में शराब तस्कर जमकर पैसा कमा रहे हैं लेकिन एक भी पैसा सरकार के खजाने में नहीं आ रहा है। उल्टे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
शराब के धंधेबाज चाहते हैं कि यह कानून बिहार में लागू रहे और उनका धंधा इसी तरह फलता फूलता रहे। लेकिन अब शराबबंदी के 10 साल बाद शराबबंदी की समीक्षा की मांग उठने लगी है। पहले विपक्ष के लोग इसकी मांग करते थे लेकिन अब सत्ता पक्ष एनडीए के घटक दल ही सदन में शराबबंदी की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। 10 साल बाद भी यदि शराब की तस्करी जारी है तो इस कानून पर सवाल उठना लाजिमी है। जब तक तस्करों के पास 'जुगाड़' और 'जोखिम' लेने की हिम्मत रहेगी, तब तक पुलिस के लिए यह चूहे-बिल्ली का खेल चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।