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Jehanabad Sadar Hospital : जनरेटर बिल ने बढ़ाई अस्पताल की मुश्किलें, DM के आदेश पर जांच कमेटी गठित; जहानाबाद सदर अस्पताल में एक साल के रिकॉर्ड की होगी जांच

जहानाबाद सदर अस्पताल में जनरेटर संचालन और डीजल खपत से जुड़े बिलों पर उठे सवालों के बाद DM छिरिङ वाई भूटिया के निर्देश पर जांच कमेटी गठित की गई है। अगस्त 2025 से अगस्त 2026 तक के रिकॉर्ड तलब किए गए हैं।

Jehanabad Sadar Hospital
Jehanabad Sadar Hospital
© AI
Tejpratap
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जहानाबाद: सदर अस्पताल, जहानाबाद में जनरेटर संचालन और डीजल खपत से जुड़े बिलों को लेकर उठे सवालों ने अब प्रशासनिक जांच का रूप ले लिया है। जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया के निर्देश के बाद मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। जांच कमेटी अब यह पता लगाएगी कि अस्पताल में जनरेटर के संचालन, डीजल की खपत और उससे संबंधित बिलों में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई।

इस संबंध में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, जहानाबाद के उप विकास आयुक्त की ओर से 17 सितंबर 2026 को पत्र जारी किया गया है। पत्र में असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी तथा सदर अस्पताल के अधीक्षक को जांच से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

बिजली की मौजूदगी के बावजूद डीजल खपत का सवाल

पूरा मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जिसमें सदर अस्पताल में बिजली उपलब्ध रहने के बावजूद जनरेटर के नाम पर डीजल की खपत और बिलिंग किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह सवाल उठाया गया कि यदि अस्पताल में बिजली की आपूर्ति हो रही थी, तो किन परिस्थितियों में जनरेटर का संचालन किया गया और उसके लिए कितनी मात्रा में डीजल की खपत दिखाई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कराने का फैसला लिया है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले यह कहना कि बिल फर्जी हैं या सरकारी राशि का गबन हुआ है, अंतिम निष्कर्ष नहीं होगा। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर आरोपों और रिकॉर्ड की सत्यता की जांच की जा रही है।

एक साल के रिकॉर्ड की होगी पड़ताल

जांच कमेटी को अगस्त 2025 से अगस्त 2026 तक की अवधि से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है। यानी करीब एक वर्ष के दौरान अस्पताल में जनरेटर संचालन और डीजल खपत का पूरा हिसाब जांच के दायरे में रहेगा।पत्र में संबंधित अधिकारियों से जनरेटर के उपयोग तथा डीजल खपत से संबंधित बिल समेत तमाम दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके लिए 18 सितंबर 2026 को अपराह्न 5 बजे तक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।अब इन दस्तावेजों के आधार पर यह देखा जाएगा कि जनरेटर वास्तव में कब-कब चलाया गया, कितने समय तक इसका इस्तेमाल हुआ, कितनी मात्रा में डीजल की खपत दर्ज की गई और उसके एवज में कितने रुपये के बिल प्रस्तुत किए गए।

लॉगबुक और बिलों से खुलेगा पूरा हिसाब

जांच में जनरेटर की लॉगबुक, डीजल खरीद और खपत के रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े बिल तथा अस्पताल के बिजली आपूर्ति से संबंधित विवरण महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि रिकॉर्ड में दर्ज जनरेटर संचालन और वास्तविक बिजली आपूर्ति के बीच कोई अंतर मिलता है, तो जांच के दौरान उसकी भी पड़ताल की जा सकती है।

खास तौर पर यह देखा जाना जरूरी होगा कि जिन तारीखों में जनरेटर चलने का दावा किया गया है, उन दिनों अस्पताल में बिजली की स्थिति क्या थी। साथ ही डीजल की मात्रा, खरीद की तारीख, बिल और जनरेटर संचालन के रिकॉर्ड आपस में मेल खाते हैं या नहीं।

जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी

जिला प्रशासन की ओर से कमेटी गठित किए जाने के बाद अब निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। रिपोर्ट में यदि किसी तरह की वित्तीय या प्रक्रियागत अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी निर्धारित की जा सकती है।

वहीं, यदि रिकॉर्ड जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। यही वजह है कि फिलहाल इस मामले में किसी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी ठहराने के बजाय जांच प्रक्रिया के निष्कर्ष का इंतजार किया जाना महत्वपूर्ण है।

एक बात साफ है—जहानाबाद सदर अस्पताल में जनरेटर और डीजल खपत से जुड़े रिकॉर्ड अब प्रशासन की जांच के दायरे में हैं। अगस्त 2025 से अगस्त 2026 तक के दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल रिकॉर्ड में गड़बड़ी का है या इसके पीछे कोई वित्तीय अनियमितता भी हुई है।