ब्रेकिंग
नहीं खत्म होगी अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता! जेडीयू नेतृत्व ने कर दी है बड़ी गलती, अब नीतीश कुमार को सामने आना होगा✦खड़गे के बयान पर अमित शाह का पलटवार, बोले- मोदी जी के पिता पर अभद्र टिप्पणी कर सारी मर्यादाएं तार-तार कीं✦ मुर्खों की टोली है कांग्रेस: खड़गे के बयान पर भड़के गिरिराज सिंह, बोले..जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है✦PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर नित्यानंद राय ने खड़गे और राहुल पर बोला हमला, कहा..इनको बिहार की जनता जवाब देगी✦पीएम मोदी के पिता पर टिप्पणी को लेकर सम्राट चौधरी का हमला, खड़गे और राहुल गांधी से माफी की मांग✦नहीं खत्म होगी अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता! जेडीयू नेतृत्व ने कर दी है बड़ी गलती, अब नीतीश कुमार को सामने आना होगा✦खड़गे के बयान पर अमित शाह का पलटवार, बोले- मोदी जी के पिता पर अभद्र टिप्पणी कर सारी मर्यादाएं तार-तार कीं✦ मुर्खों की टोली है कांग्रेस: खड़गे के बयान पर भड़के गिरिराज सिंह, बोले..जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है✦PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर नित्यानंद राय ने खड़गे और राहुल पर बोला हमला, कहा..इनको बिहार की जनता जवाब देगी✦पीएम मोदी के पिता पर टिप्पणी को लेकर सम्राट चौधरी का हमला, खड़गे और राहुल गांधी से माफी की मांग

जमुई MP के सामने जीतन राम मांझी और प्रफुल्ल मांझी मुर्दाबाद के लगे नारे, प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे थे सांसद अरुण भारती

आरक्षण और महादलित वर्गीकरण को लेकर एनडीए के दो दलों में बयानबाजी तेज हो गई है। जमुई सांसद अरुण भारती ने जीतन राम मांझी से महादलित वर्गीकरण के लाभ और 2007 के फैसले की समीक्षा को लेकर सवाल पूछे।

बिहार न्यूज
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

JAMUI: दलितों के वर्गीकरण और महादलित श्रेणी को लेकर जमुई सांसद अरुण भारती ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को जमुई पहुंचने पर परिसदन में मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद ने कहा कि उन्होंने जीतन राम मांझी से एक स्पष्ट नीतिगत सवाल पूछा था और उसका जवाब भी नीतिगत तरीके से मिलना चाहिए था। लेकिन, सवाल का जवाब देने के बजाय व्यक्ति और परिवार पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका सवाल आज भी कायम है और जब तक उसका तथ्यात्मक जवाब नहीं मिलता, तब तक यह मुद्दा उठता रहेगा।


अरुण भारती ने कहा कि वर्ष 2007 में बिहार में दलितों का वर्गीकरण कर उन्हें दलित और महादलित श्रेणी में बांटा गया था। उस समय जीतन राम मांझी एससी-एसटी कल्याण मंत्री थे और बाद में वे बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। वहीं, उनके पुत्र संतोष कुमार सुमन के पास भी लंबे समय तक इसी विभाग की जिम्मेदारी रही। सांसद ने सवाल उठाया कि जिन जातियों को महादलित श्रेणी में शामिल किया गया था, उन्हें इस वर्गीकरण से वास्तविक रूप से कितना लाभ मिला? क्या सरकार ने कभी इसका आकलन या समीक्षा कराई है?


उन्होंने कहा कि एक समय पासी, पासवान, रविदास और रजक समाज को महादलित श्रेणी से बाहर कर दिया गया था। सवाल यह है कि इन चार जातियों को महादलित श्रेणी से बाहर करने का आधार क्या था? क्या इसके लिए कोई सर्वेक्षण, रिपोर्ट या विशेषज्ञ समिति की सिफारिश थी?


सांसद ने कहा कि अब इन्हीं चार जातियों को दोबारा महादलित श्रेणी में शामिल किया गया है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि वर्तमान निर्णय सही है तो वर्ष 2007 में लिया गया फैसला क्या गलत था? उन्होंने पूछा कि उस निर्णय के कारण बीच के वर्षों में इन जातियों को योजनाओं और सरकारी सुविधाओं से जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कौन करेगा? अरुण भारती ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय पर सरकार से जवाब मांगना है। प्रेस कांफ्रेंस के बाद सांसद के सामने जीतन राम मांझी और प्रफुल्ल मांझी के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए।

टैग्स
रिपोर्टिंग
D

रिपोर्टर

Dhiraj Kumar Singh

FirstBihar संवाददाता