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जमुई में BPSC शिक्षक बहाली पर सवाल, एक नाम और रौल नंबर से दो स्कूलों में नियुक्ति का दावा

जमुई में टीआरई-1 और टीआरई-2 के तहत एक ही रोल नंबर और पहचान संख्या के आधार पर दो अलग-अलग विद्यालयों में नियुक्ति और योगदान का दावा सामने आया है। मामले में आरटीआई के जरिए बीपीएससी से बायोमेट्रिक, उपस्थिति और वेतन रिकॉर्ड मांगे गए हैं।

बिहार न्यूज
RTI में मांगे गए बायोमेट्रिक से लेकर वेतन भुगतान तक के रिकॉर्ड
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

JAMUI: बिहार में शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए तमाम तकनीकी व्यवस्थाओं के बावजूद जमुई से सामने आये एक मामले ने कई सवाल खड़ा कर रहा है। टीआरई-1 और टीआरई-2 में एक ही अभ्यर्थी के समान रोल नंबर और पहचान संख्या के आधार पर दो अलग-अलग विद्यालयों में नियुक्ति और योगदान किए जाने का दावा किया गया है। मामले को लेकर सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत बीपीएससी से ऐसे दस्तावेज मांगे गए हैं, जो सामने आने पर पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकती है। 


आरटीआई आवेदन में अभ्यर्थी हलीमा खातून का रोल नंबर 832145 और पहचान संख्या BPJAM22317772687 बताई गई है। आवेदनकर्ता के अनुसार टीआरई-1 के तहत उनकी नियुक्ति प्लस टू एसके उच्च विद्यालय, चकाई में विज्ञान शिक्षिका के रूप में हुई। आरोप है कि करीब छह महीने बाद टीआरई-2 के तहत इसी रोल नंबर और पहचान संख्या के आधार पर उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बल्लोपुर, खैरा में भी योगदान किया गया।


सवाल सिर्फ दो नियुक्तियों का नहीं, सिस्टम का भी

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दो अलग-अलग शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में एक अभ्यर्थी को एक ही रोल नंबर और समान पहचान संख्या मिल सकती है? अगर नहीं, तो फिर दोनों नियुक्तियों में समान विवरण कैसे सामने आया? और यदि पहली नियुक्ति के बाद दूसरी जगह योगदान हुआ, तो क्या पहले विद्यालय से विधिवत त्यागपत्र और विरमन की प्रक्रिया पूरी की गई थी? आरटीआई में बीपीएससी से इसी तकनीकी व्यवस्था की जानकारी मांगी गई है। आयोग की सॉफ्टवेयर प्रणाली, रोल नंबर आवंटन की प्रक्रिया, तकनीकी नियमावली और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि समान पहचान संख्या का दोबारा इस्तेमाल संभव है या नहीं।


बायोमेट्रिक और अंगूठे के निशान से खुलेगा राज?

आवेदन में केवल नियुक्ति पत्रों तक सीमित जानकारी नहीं मांगी गई है। अभ्यर्थी की डिजिटल उपस्थिति, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, अंगूठे के निशान, परीक्षा में उपस्थिति, उत्तर पुस्तिका और मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए हैं। यह भी पूछा गया है कि संबंधित अभ्यर्थी टीआरई-1 और टीआरई-2 की परीक्षा में वास्तव में उपस्थित हुई थीं या नहीं। यदि किसी परीक्षा में उनकी उपस्थिति नहीं थी, तो फिर परिणाम में नाम शामिल होने का आधार क्या था? इस संबंध में यदि आयोग अथवा किसी अन्य सक्षम स्तर पर जांच हुई है तो उसकी रिपोर्ट भी मांगी गई है।


दो स्कूलों की हाजिरी और वेतन रिकॉर्ड भी मांगे

आरटीआई में चकाई और बल्लोपुर दोनों विद्यालयों की प्रथम एवं अंतिम उपस्थिति पंजी, दोनों जगह से किए गए वेतन भुगतान का विवरण, कोषागार रिकॉर्ड और संबंधित बैंक भुगतान के दस्तावेज भी मांगे गए हैं। इन रिकॉर्ड से यह पता चल सकेगा कि दोनों विद्यालयों में संबंधित अवधि के दौरान अभ्यर्थी की उपस्थिति दर्ज हुई थी या नहीं और क्या दोनों जगह से वेतन भुगतान हुआ। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि हलीमा खातून के पति मुर्तजा आलम जमुई शिक्षा विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। हालांकि, इस तथ्य का कथित दोहरी नियुक्ति से कोई संबंध है या नहीं, यह आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।


अब बीपीएससी के जवाब पर टिकी नजर

निर्धारित शुल्क के साथ भारतीय डाक आदेश के माध्यम से बीपीएससी के लोक सूचना पदाधिकारी को भेजे गए आवेदन में कई बिंदुओं पर प्रमाणित दस्तावेज मांगे गए हैं। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही बीपीएससी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया है। अब सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आयोग आरटीआई में मांगे गए दस्तावेजों में क्या जानकारी देता है। यदि रिकॉर्ड में एक ही अभ्यर्थी के दो विद्यालयों में योगदान, दोहरे वेतन भुगतान अथवा भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी विसंगति की पुष्टि होती है, तो यह केवल एक अभ्यर्थी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षक बहाली की पूरी प्रक्रिया में डेटा सत्यापन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा।

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रिपोर्टर

Dhiraj Kumar Singh

FirstBihar संवाददाता