Bihar Dunki Route Case: विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर सीमांचल के युवाओं से कथित ठगी और उन्हें अवैध रास्तों से विदेश भेजने के आरोप में किशनगंज पुलिस ने AIMIM नेता हाजी नाहिद गनी और मोहम्मद तवरेज को गिरफ्तार किया है. दोनों की गिरफ्तारी पटना में एसटीएफ के सहयोग से की गई. पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपितों के खिलाफ किशनगंज और पूर्णिया जिले के अलग-अलग थानों में पहले से कई मामले दर्ज हैं.
हाजी नाहिद गनी पूर्णिया जिले के रौटा का रहने वाला है, जबकि मोहम्मद तवरेज अनगढ़ का निवासी बताया गया है. पुलिस का आरोप है कि दोनों विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से मोटी रकम लेते थे. इसके बाद उन्हें दुबई, सऊदी अरब, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जाता था.
किशनगंज पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि अब तक कितने युवाओं को इस तरीके से विदेश भेजा गया और उनसे कितनी रकम वसूली गई.
दुबई में फंसे युवकों ने भी लगाया था आरोप
विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को भेजने का मामला इसी साल अगस्त में भी सामने आया था. पूर्णिया के अमौर और किशनगंज के कोचाधामन क्षेत्र के सात युवकों के दुबई में फंसे होने की जानकारी सामने आई थी. इन युवकों ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई थी.
युवकों ने आरोप लगाया था कि नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे करीब डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लिए गए थे, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद उन्हें वादा किया गया रोजगार नहीं मिला. उनका यह भी आरोप था कि उनके पासपोर्ट एजेंट के पास थे और पैसे खत्म होने के बाद खाने-पीने और रहने तक की परेशानी होने लगी थी.
वीडियो सामने आने के बाद किशनगंज के पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद आलम ने युवकों से वीडियो कॉल पर बातचीत की थी. बातचीत के दौरान दुबई में फंसे एक युवक ने बताया था कि वे लोग करीब 17 दिनों से वहां फंसे हैं. घर से लाए पैसे खत्म हो चुके हैं और वहां रहने-खाने में परेशानी हो रही है. पुलिस के अनुसार, इन युवकों को भी हाजी नाहिद गनी ने ही विदेश भेजा था.
1.80 लाख रुपये लेकर थाईलैंड के रास्ते मलेशिया भेजने का आरोप
किशनगंज पुलिस के सामने आए एक अन्य मामले में विदेश भेजने के नाम पर 1.80 लाख रुपये लेने और युवक को कथित तौर पर अवैध रास्ते से मलेशिया पहुंचाने का आरोप है. विशनपुर थाना कांड संख्या 47/26 में शिकायतकर्ता मोहम्मद सुलेमान ने आरोप लगाया कि उनके बेटे नूरजफर को विदेश भेजने के नाम पर यह रकम ली गई थी.
शिकायत के अनुसार, 9 सितंबर 2026 को नूरजफर को पटना से दिल्ली और फिर थाईलैंड के क्राबी भेजा गया. इसके बाद 18 सितंबर को कथित तौर पर डंकी रूट के जरिए उसे मलेशिया पहुंचाया गया.
पुलिस के मुताबिक, मलेशिया पहुंचने के बाद नूरजफर को कई अन्य युवकों के साथ एक कमरे में रखा गया. बाद में उसे जोहोर स्थित बायोसीन एसडीएन बीएचडी नाम की कंपनी में काम पर लगाया गया.
एसडीपीओ खुसरु सिराज के अनुसार, मलेशियाई इमिग्रेशन पुलिस की छापेमारी के दौरान कई युवकों को गिरफ्तार किया गया था. इसी दौरान नूरजफर जंगल में छिपकर गिरफ्तारी से बच गया और बाद में स्थानीय एजेंट की मदद से भारत लौट आया.
पुलिस इस मामले में विदेश भेजने के नाम पर रकम वसूलने, युवाओं को कथित तौर पर अवैध रास्ते से दूसरे देश में पहुंचाने और वहां उनके साथ हुए व्यवहार से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
किशनगंज से पूर्णिया तक कई मामलों की जांच
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों से जुड़े मामले किशनगंज जिले के कोचाधामन, बहादुरगंज और विशनपुर थानों के अलावा पूर्णिया जिले के रौटा थाना में भी दर्ज हैं. इन मामलों में धोखाधड़ी, मानव तस्करी से जुड़े आरोपों और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है.
पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने एसटीएफ के सहयोग से दोनों आरोपितों को पटना से गिरफ्तार किया है. अब पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर कथित एजेंटों और विदेश में संपर्क रखने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है.
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि युवाओं से रकम लेने के बाद उन्हें अलग-अलग देशों तक किस माध्यम से भेजा जाता था और मलेशिया में कथित तौर पर सक्रिय एजेंटों की इस नेटवर्क में क्या भूमिका थी.





