पटना : बिहार की पंचायतों में अब बिजली की व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। गांवों में बनी पंचायत सरकार भवनों की छतों पर सोलर पैनल तो लगेंगे ही, लेकिन अब इनकी क्षमता भी पहले से चार गुना अधिक होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि जलमीनारों पर प्रस्तावित 5 किलोवाट की जगह अब 20 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए जाएं। सरकार का मकसद है कि सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक इस्तेमाल हो और इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों को मिले।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने केवल योजनाओं की प्रगति की जानकारी नहीं ली, बल्कि अधिकारियों को गांवों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अहम निर्देश भी दिए। इस बैठक में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश भी मौजूद रहे।
सबसे ज्यादा चर्चा सोलर पैनल की क्षमता बढ़ाने के फैसले को लेकर रही। अब तक जलमीनारों पर 5 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे बढ़ाकर 20 किलोवाट करने का निर्देश दिया। यानी अब पहले की तुलना में चार गुना अधिक क्षमता वाले सोलर पैनल लगाने की तैयारी होगी। इससे सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर बिजली से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
पंचायत सरकार भवन बनेंगे गांव की नई पहचान
बिहार के गांवों में पंचायत सरकार भवनों को प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने इनके निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ भवनों के रखरखाव पर भी विशेष जोर दिया। अक्सर सरकारी भवन बन जाने के बाद उनकी देखरेख को लेकर सवाल उठते हैं। कहीं मरम्मत की जरूरत होती है तो कहीं साफ-सफाई और दूसरी सुविधाओं की स्थिति खराब हो जाती है।
मुख्यमंत्री ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अधिकारियों को एक प्रभावी व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन संवेदकों को पंचायत सरकार भवनों के निर्माण का काम दिया गया है, उन्हीं को इनके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी दी जाए। इसके लिए संवेदकों की जवाबदेही यानी लायबिलिटी स्पष्ट की जाए, ताकि निर्माण के बाद भवनों की हालत खराब होने पर जिम्मेदारी तय की जा सके।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि पंचायत सरकार भवन केवल बनकर तैयार न हों, बल्कि लंबे समय तक बेहतर स्थिति में भी बने रहें। इसके लिए नियमित निरीक्षण और रखरखाव का मजबूत मैकेनिज्म तैयार करने पर जोर दिया गया।
पंचायत सरकार भवनों की छतों से भी बनेगी बिजली
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत सरकार भवनों के सोलराइजेशन को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भवनों के निर्माण के एस्टीमेट में ही सोलर पैनल लगाने की व्यवस्था शामिल की जाए। यानी बाद में अलग से योजना बनाने और बजट का इंतजार करने के बजाय शुरुआत से ही भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की तैयारी हो।
इसके लिए 15वें वित्त आयोग और सप्तम राज्य वित्त आयोग की राशि को भी उपयोग में लाने की बात कही गई। सरकार चाहती है कि वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित हो, जिससे सोलराइजेशन का काम बीच में न अटके और योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके। इस कदम से पंचायत सरकार भवनों में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने का रास्ता खुलेगा। साथ ही, सौर ऊर्जा को गांवों के बुनियादी ढांचे का हिस्सा बनाने की दिशा में भी काम आगे बढ़ेगा।
अब मुखिया से सांसद तक रोज मिलेगी बिजली की रिपोर्ट
बैठक का एक और अहम फैसला पंचायतों में बिजली आपूर्ति की निगरानी से जुड़ा रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों में कितने घंटे बिजली मिल रही है, इसकी जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधियों को नियमित रूप से मिलनी चाहिए। इसके लिए एक डेडिकेटेड टीम गठित करने का निर्देश दिया गया है। यह टीम पंचायत के मुखिया, विधायक और सांसद सहित सभी संबंधित जनप्रतिनिधियों के निर्धारित मोबाइल नंबर पर उनके क्षेत्र की प्रत्येक पंचायत में प्रतिदिन बिजली आपूर्ति के घंटों की जानकारी उपलब्ध कराएगी।
इसका मतलब है कि अब बिजली आपूर्ति को लेकर केवल शिकायतों या विभागीय दावों पर निर्भर रहने के बजाय जनप्रतिनिधियों को नियमित आंकड़े मिल सकेंगे। यदि किसी पंचायत में बिजली कम मिल रही है तो संबंधित जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को अधिकारियों के सामने उठा सकेंगे। इससे बिजली आपूर्ति की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सामने रखा योजनाओं का खाका
बैठक में पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने विभाग की प्रस्तावित योजनाओं और उनके क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मुख्यमंत्री के समक्ष विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्यमंत्री ने योजनाओं को तेजी से लागू करने और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी सरकार की इस समीक्षा बैठक में पंचायतों को सौर ऊर्जा से जोड़ने, सरकारी भवनों की देखरेख सुनिश्चित करने और बिजली आपूर्ति की निगरानी को मजबूत बनाने की दिशा में कई अहम फैसले सामने आए। अब देखना होगा कि इन निर्देशों के बाद बिहार की पंचायतों में सोलर पैनल लगाने से लेकर रोजाना बिजली आपूर्ति की रिपोर्टिंग तक की व्यवस्था कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है।





