Bihar News : बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब शहरों की तर्ज पर गांवों में भी होर्डिंग, बैनर और अन्य विज्ञापनों पर शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के लिए नक्शा पास कराना और संबंधित प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। इन प्रावधानों को बिहार पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए लागू करने की तैयारी है।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकार ने इस संशोधन विधेयक की प्रति सदन में रखी। विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने और राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने के बाद नए नियम पूरे राज्य में लागू हो जाएंगे।
पंचायतों को मिलेगा विज्ञापन शुल्क
नए विधेयक के अनुसार ग्राम पंचायतों के सार्वजनिक स्थानों, सरकारी भूमि और भवनों पर विज्ञापन लगाने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए विज्ञापन एजेंसियों या संबंधित संस्थाओं से निर्धारित शुल्क वसूला जाएगा। यह राशि सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जाएगी, जिससे पंचायतों की आमदनी बढ़ेगी और स्थानीय विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पंचायतें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनेंगी और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू कर सकेंगी।
बहुमंजिला भवनों पर सख्त नियम
संशोधन विधेयक में ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे निर्माण कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए नए प्रावधान भी किए गए हैं। अब गांवों में अपार्टमेंट या बहुमंजिला भवन बनाने से पहले नक्शा स्वीकृत कराना अनिवार्य होगा।
नक्शा स्वीकृति के दौरान सड़क की चौड़ाई, पार्किंग, जल निकासी, सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही निर्माण की अनुमति मिलेगी।
रेरा की तर्ज पर बनेगा प्राधिकरण
ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण की निगरानी के लिए रियल एस्टेट विनियमन एवं विकास अधिनियम (RERA) की तर्ज पर एक प्राधिकरण गठित किया जाएगा। यही संस्था बहुमंजिला भवनों के नक्शे की स्वीकृति देगी और NOC जारी करेगी।
इसके अलावा 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट शुरू करने वाले बिल्डरों को खरीदारों से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत अलग एस्क्रो खाते में रखना होगा। साथ ही तय समय पर खरीदारों को कब्जा देना भी अनिवार्य होगा।
पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी
सरकार का कहना है कि इन नए नियमों से ग्रामीण क्षेत्रों में प्लॉट, मकान और कॉलोनियों के विकास में पारदर्शिता आएगी। अवैध निर्माण पर रोक लगेगी और खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी। साथ ही भवन निर्माण की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा।
यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो बिहार के ग्रामीण इलाकों में भवन निर्माण और विज्ञापन व्यवस्था दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पंचायतों की आय बढ़ाने के साथ-साथ योजनाबद्ध विकास को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।





