Bihar Flood News: बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर कर दिया है। राज्य के 12 जिलों में बाढ़ का असर बढ़ता जा रहा है। कई जगहों पर तटबंधों पर दबाव बना हुआ है, तो दूसरी ओर नए इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है। सबसे चिंताजनक तस्वीर पटना की है, जहां गंगा का जलस्तर नया रिकॉर्ड बना चुका है।
शनिवार को पटना के गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया। यह वर्ष 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के उच्चतम स्तर से भी अधिक है। यानी गंगा ने करीब एक दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रविवार को जलस्तर के 50.62 मीटर तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 183 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में पटना के निचले और नदी के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
आरा और हाजीपुर के शहरों में घुसा बाढ़ का पानी
बाढ़ का असर अब सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। भोजपुर के आरा और वैशाली के हाजीपुर के शहरी इलाकों में भी पानी पहुंच गया है।
हाजीपुर शहर के आठ वार्ड बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। वहीं आरा शहर के छह वार्डों में पानी फैल गया है। कई स्थानों पर लोगों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
हाजीपुर-महनार रोड एसएच-122बी पर नयागंज और हसनपुर पलवैया के पास पानी आने से यातायात प्रभावित हुआ है। महात्मा गांधी सेतु से कोनहाराघाट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर भी बाढ़ के पानी का असर पड़ा है।
भोजपुर के बड़हरा और शाहपुर समेत कई प्रखंडों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। सरैया-आरा मुख्य मार्ग पर चौमुखा, पिपरा और यादवपुर के पास भी सड़क पर पानी चढ़ने की सूचना है।
सारण में दो जगह टूटे नदी के बांध
सारण जिले में बाढ़ की स्थिति ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब दो अलग-अलग स्थानों पर नदी के बांध टूट गए।
दिघवारा प्रखंड की त्रिलोकचक पंचायत के केशरपुर गांव के पास माही नदी का बांध करीब 25 से 30 फीट चौड़ाई में टूट गया। इसके बाद आसपास के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया।
वहीं दरियापुर में मठिया के पास सुखमयी नदी का बांध टूटने से भी हालात बिगड़ गए हैं। पानी के फैलाव ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सिर्फ गंगा नहीं, कई नदियां उफान पर
बिहार में इस समय सिर्फ गंगा ही चिंता का कारण नहीं है। सोन, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, घाघरा और बागमती समेत कई नदियों का जलस्तर भी कई स्थानों पर लाल निशान से ऊपर बताया जा रहा है।
नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है और राहत एवं बचाव की तैयारियों को तेज किया गया है।
NDRF-SDRF की 34 टीमें मैदान में
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए NDRF की 7 और SDRF की 27 टीमें, यानी कुल 34 टीमें तैनात की गई हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 50 मेडिकल कैंप चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा 19 बोट एंबुलेंस और 36 पशु चिकित्सा शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं।
लोगों के आवागमन और बचाव अभियान के लिए 858 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ के पानी में फंसे लोगों तक राहत सामग्री और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं जल्द से जल्द पहुंचाई जा सकें।
12 जिलों के अधिकारियों को जमीन पर उतरने का निर्देश
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना, बक्सर, भोजपुर, सारण, वैशाली, बेगूसराय, मुंगेर, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार के प्रभारी मंत्री एवं प्रभारी सचिवों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत-बचाव कार्यों की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है।
पटना में शहरी सुरक्षा तटबंध और उसके आसपास के इलाकों पर 24 घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने की हवाई सर्वे से स्थिति की समीक्षा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने भागलपुर के नवगछिया में राघोपुर तटबंध का निरीक्षण किया और बेगूसराय, मुंगेर तथा खगड़िया में बाढ़ की तैयारियों और राहत कार्यों की समीक्षा की।
एरियल सर्वे के जरिए भी बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई की संख्या बढ़ाने और उन्हें 24 घंटे संचालित रखने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में मोबाइल मेडिकल टीम भेजने, दियारा क्षेत्रों में बोट एंबुलेंस की व्यवस्था करने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मेडिकल कैंप लगाने को कहा गया है।
किसानों के लिए भी बड़ा निर्देश
बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने का निर्देश दिया है। उनका कहना है कि कोई भी पात्र किसान सरकारी सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए।
फिलहाल बिहार में बाढ़ का संकट लगातार बढ़ता दिख रहा है। गंगा का रिकॉर्ड स्तर, शहरों में घुसता पानी और कई नदियों का उफान प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले घंटों में नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव बेहद महत्वपूर्ण होगा।





