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Bihar News: डेढ़ बीघा जमीन, फ्लैट और लाखों के जेवर… बिहार के इंजीनियर की संपत्ति देख निगरानी टीम भी हैरान

बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के पटना, छपरा, कटिहार और दार्जिलिंग स्थित ठिकानों पर छापेमारी। आय से 1.10 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति के मामले में 5.70 लाख नकद, आभूषण और जमीन के दस्तावेज मिले।

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Tejpratap
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Bihar News:  बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई के दौरान ग्रामीण कार्य विभाग के एक कार्यपालक अभियंता की संपत्ति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सारण में तैनात इंजीनियर चंद्रशेखर सिंह के पटना, छपरा, कटिहार और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग स्थित ठिकानों पर छापेमारी की गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, इंजीनियर के खिलाफ आय से 1.10 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। तलाशी के दौरान जमीन के दस्तावेज, नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और फ्लैट से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं।


निगरानी ब्यूरो की इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के फनसीदेवा इलाके में खरीदी गई जमीन को लेकर हो रही है। जांच के अनुसार, इंजीनियर की पत्नी श्वेता कुमारी के नाम पर वर्ष 2021 में कुल 10 रजिस्ट्री के माध्यम से 92 डिसमिल जमीन खरीदी गई थी। यह जमीन करीब डेढ़ बीघा के बराबर बताई जा रही है। खास बात यह है कि जमीन की खरीद के समय चंद्रशेखर सिंह अररिया जिले के फारबिसगंज में सहायक अभियंता के पद पर तैनात थे। राष्ट्रीय राजमार्ग के नजदीक स्थित इस जमीन का बाजार मूल्य करोड़ों रुपये आंका जा रहा है।


जांच एजेंसी के मुताबिक, इंजीनियर, उनकी पत्नी और परिजनों के नाम पर कुल 14 अचल संपत्तियों का पता चला है। इनकी कीमत करीब 1.79 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य और उनके आय से अधिक होने के संबंध में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।


छापेमारी के दौरान पटना के जगदेव पथ स्थित एक अपार्टमेंट में तीन बेडरूम वाले फ्लैट की जानकारी मिली। वहीं, कटिहार के लोहिया नगर स्थित पैतृक आवास की भी तलाशी ली गई। अधिकारियों के अनुसार, पटना और कटिहार के ठिकानों से कुल 5.70 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा कटिहार स्थित आवास से लगभग 250 ग्राम सोने-चांदी के आभूषण और एक हीरे की अंगूठी मिलने की जानकारी सामने आई है। जब्त आभूषणों का मूल्यांकन कराने के लिए स्वर्णकार को भी बुलाया गया था।


कटिहार में निगरानी टीम ने आवास की अलमारियों और अन्य स्थानों पर रखे दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर जमीन खरीदे जाने से संबंधित कई केवाला और रजिस्ट्री के कागजात मिले। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ दस्तावेज पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में स्थित जमीन से संबंधित बताए गए हैं। इन कागजातों की जांच कर संपत्तियों की खरीद, स्वामित्व और मूल्य का मिलान किया जा रहा है।


छपरा में भी निगरानी ब्यूरो की टीम ने ग्रामीण कार्य विभाग के जांच एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्रमंडल कार्यालय में करीब दो घंटे तक छानबीन की। कार्यालय में मौजूद फाइलों, विभागीय अभिलेखों और दूसरे जरूरी कागजातों को खंगाला गया। कार्रवाई के दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। टीम में डीएसपी और अन्य अधिकारी शामिल थे।


इस पूरे मामले में चार ठिकानों पर एक साथ हुई छापेमारी ने सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और आय के स्रोतों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकारी सेवा में रहते हुए खरीदी गई जमीन और फ्लैट की जानकारी सामने आई है, तो दूसरी तरफ नकदी और आभूषणों की बरामदगी भी जांच का हिस्सा बनी है।


हालांकि, किसी संपत्ति का मिलना अपने आप में भ्रष्टाचार का अंतिम प्रमाण नहीं है। जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि संबंधित संपत्तियां किन स्रोतों से खरीदी गईं, उनकी खरीद के लिए घोषित आय पर्याप्त थी या नहीं और क्या इनका संबंध कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले से है। निगरानी ब्यूरो की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, इंजीनियर चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ दर्ज मामले में संपत्ति और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल जारी है।