Bihar News : बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश जारी किया है कि राज्य के सभी जिला अस्पतालों में अगले सात दिनों के भीतर आईसीयू (ICU) और 24 घंटे इमरजेंसी सेवा पूरी तरह चालू कर दी जाए। इसके साथ ही मरीजों को बिना ठोस कारण के बड़े अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में रेफर करने की व्यवस्था पर भी सख्ती की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब जिला अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे जिलों या बड़े अस्पतालों का चक्कर न लगाना पड़े। इससे आम लोगों को अपने ही जिले में बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा।
रेफर करने से पहले बताना होगा स्पष्ट कारण
नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी मरीज को हायर सेंटर रेफर करने से पहले संबंधित चिकित्सक को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवश्यक इलाज या सुविधा उस अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। यदि मरीज को रेफर किया जाता है तो उसका स्पष्ट कारण लिखित रूप में दर्ज करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा मरीज की पूरी इलाज प्रक्रिया और रेफरल से जुड़ी जानकारी भाव्या पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेट की जाएगी। इसकी कंप्यूटरीकृत प्रति मरीज या उसके परिजनों को भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे इलाज की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड रहे।
गंभीर मरीजों को पहले किया जाएगा स्थिर
स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि गंभीर मरीजों को रेफर करने से पहले उनकी स्थिति को स्थिर (स्टेबल) किया जाए। इसके बाद उन्हें सरकारी एंबुलेंस के माध्यम से सुरक्षित तरीके से संबंधित उच्च चिकित्सा संस्थान भेजा जाएगा, ताकि रास्ते में किसी तरह की परेशानी न हो।
डॉक्टरों और कर्मचारियों का ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी
नई व्यवस्था के तहत सभी चिकित्सकों और पारा मेडिकल कर्मियों का भाव्या पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। अस्पतालों को डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। साथ ही अस्पताल में उपलब्ध सभी चिकित्सा सुविधाओं की अद्यतन जानकारी भी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
इलाज की पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी और दुर्घटना में आने वाले सभी मरीजों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से तैयार किया जाएगा। मरीज का पंजीकरण, डॉक्टर की सलाह, जांच रिपोर्ट, दवा, उपचार और रेफरल सहित पूरी प्रक्रिया भाव्या पोर्टल पर दर्ज रहेगी।
भर्ती मरीजों का आभा आईडी (ABHA ID) बनाकर उनका इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) तैयार किया जाएगा। इससे भविष्य में इलाज के दौरान डॉक्टरों को मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री आसानी से उपलब्ध हो सकेगी और बेहतर उपचार देने में मदद मिलेगी।
जिला स्तर पर होगी रेफरल व्यवस्था की निगरानी
सरकार ने रेफरल व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण समिति गठित करने का फैसला किया है। यह समिति नियमित रूप से रेफरल मामलों की समीक्षा करेगी और यदि किसी अस्पताल से बिना उचित कारण मरीजों को रेफर किया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा राज्य स्तर पर भी एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो सभी जिलों की रेफरल व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग करेगा और समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित करेगा।
मरीजों को मिलेगा अपने जिले में बेहतर इलाज
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जिला अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों या सामान्य गंभीर मामलों में बड़े मेडिकल कॉलेजों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। इससे मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा और जिला अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के सरकार के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।





