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मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर घूसखोरी: पंचायत सचिव पर 9 हजार रुपये लेने का आरोप

BIHAR: ‘डिजिटल इंडिया’ के नाम पर एक ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर एक साधारण मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए क्यों देने पड़े ₹9000—और वो भी ऑनलाइन?

मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर घूसखोरी: पंचायत सचिव पर 9 हजार रुपये लेने का आरोप
Ramakant kumar
3 मिनट

BIHAR: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड से भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी सेवा के नाम पर खुलेआम अवैध वसूली का आरोप लगा है। मामला नारायणपुर पंचायत का है, जहां एक युवक ने पंचायत सचिव पर उसकी दादी के मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले ₹9000 रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। खास बात यह है कि यह कथित घूसखोरी ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में ऑनलाइन माध्यम से की गई, जिससे पूरा मामला और भी चर्चा में आ गया है।


डिजिटल ट्रांजैक्शन बना सबूत

नारायणपुर पंचायत के वार्ड संख्या-10 निवासी सुजीत कुमार ने आरोप लगाया है कि उनकी दादी के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पंचायत सचिव बबलू कुमार ने पैसे की मांग की। पीड़ित का कहना है कि मजबूरी में उसने ₹9000 की राशि PhonePe के जरिए ट्रांसफर कर दी।


आमतौर पर ऐसे मामलों में सबूत के अभाव में शिकायतें दब जाती हैं, लेकिन इस बार डिजिटल पेमेंट की रसीद ही आरोपी के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गई है। यही वजह है कि मामला अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।


लोक शिकायत निवारण में पहुंचा मामला

इस पूरे प्रकरण को लेकर सुजीत कुमार ने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। 16 अप्रैल को इस मामले की पहली सुनवाई हुई, जिसमें शिकायतकर्ता तो उपस्थित रहे, लेकिन आरोपी पंचायत सचिव बबलू कुमार हड़ताल का हवाला देकर पेश नहीं हुए।


उनकी अनुपस्थिति को देखते हुए मामले को गंभीर मानते हुए कार्यालय ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के प्रतिनिधि को त्वरित कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


30 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

मामले में डिजिटल भुगतान की रसीद को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसके आधार पर अब प्रशासन गहन जांच में जुट गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को सुबह 11 बजे पकड़ीदयाल अनुमंडल कार्यालय में तय की गई है।


क्षेत्र में बना चर्चा का विषय

इस घटना के सामने आने के बाद पूरे प्रखंड में हड़कंप मचा हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकारी योजनाओं और सेवाओं को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है, तो उसी का इस्तेमाल अगर घूसखोरी के लिए होने लगे, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।