PATNA: बिहार सरकार ने राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े सर्किल रेट (न्यूनतम मूल्य) में बड़ा संशोधन किया है। नई दरों के लागू होने के बाद पटना के कई प्रमुख इलाकों में जमीन की सरकारी कीमत दोगुनी हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी जमीन की कीमतों में लगभग 1.6 गुना की वृद्धि की गई है। राज्य सरकार की ओर से गुरुवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई और नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।
फ्रेजर रोड और बोरिंग रोड में सबसे बड़ा असर
नई सर्किल रेट व्यवस्था के तहत पटना के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय इलाकों में जमीन की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। फ्रेजर रोड में पहले जमीन का सर्किल रेट 1 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा था, जिसे बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा कर दिया गया है।
बोरिंग रोड में पहले सर्किल रेट 40 लाख रुपये प्रति कट्ठा था, जो अब बढ़कर 80 लाख रुपये प्रति कट्ठा हो गया है। इसके अलावा कंकड़बाग, पाटलिपुत्र, कदमकुआं जैसे शहरी इलाकों में भी जमीन की सरकारी कीमत लगभग दोगुनी कर दी गई है।
दानापुर क्षेत्र में भी भारी बढ़ोतरी
दानापुर अनुमंडल के विभिन्न इलाकों में जमीन की कीमतों में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। कई स्थानों पर जमीन का नया सर्किल रेट डेढ़ करोड़ से लेकर दो करोड़ रुपये प्रति कट्ठा तक निर्धारित किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों को अब अधिक रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप शुल्क देना होगा।
हर साल बढ़ेगी जमीन और मकान की कीमत
नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में जमीन और मकानों के न्यूनतम मूल्य (एमवीआर) में 5 प्रतिशत की स्वतः वृद्धि होगी। इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में जमीन की सरकारी कीमतें बिना किसी अलग अधिसूचना के नियमित रूप से बढ़ती रहेंगी।
शुक्रवार से रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को नई बढ़ी हुई दरों के अनुसार शुल्क देना होगा।
स्टांप शुल्क भी बढ़ा
राज्य सरकार ने केवल सर्किल रेट ही नहीं बढ़ाया है बल्कि स्टांप शुल्क में भी वृद्धि की है। सामान्य स्टांप शुल्क दर में 1 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पहले जहां स्टांप शुल्क 6 प्रतिशत था, अब इसे बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति कृषि योग्य जमीन खरीदता है, तो रजिस्ट्री के समय उसे पहले की तुलना में अधिक स्टांप शुल्क देना पड़ेगा। एक अनुमान के अनुसार 80 से 90 हजार रुपये तक अतिरिक्त स्टांप शुल्क का बोझ पड़ सकता है।
क्यों बढ़ाया गया सर्किल रेट?
निबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पटना और उसके आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में जमीन के बाजार मूल्य में काफी तेजी से वृद्धि हुई है। लेकिन सरकारी सर्किल रेट स्थानीय बाजार दरों की तुलना में काफी कम थे। इसी अंतर को कम करने के लिए नई दरें लागू की गई हैं।
पटना जिला निबंधन कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य के बीच बड़ा अंतर होने के कारण नई दरों का निर्धारण किया गया है।
2013 और 2016 के बाद इजाफा
जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सर्किल रेट में अंतिम बड़ा संशोधन 2013 में किया गया था, जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए 2016 में बदलाव किया गया था। इसके बाद लंबे समय तक दरों में व्यापक संशोधन नहीं हुआ था। अब राज्य सरकार ने नई अधिसूचना जारी कर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए नई दरें लागू कर दी हैं।
नई श्रेणियां भी तय
सरकार ने जमीन की श्रेणियों में भी बदलाव किया है ग्रामीण और परिधीय क्षेत्रों की भूमि को 7 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। शहरी और महानगरीय क्षेत्रों की भूमि को 6 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसी आधार पर विभिन्न क्षेत्रों की जमीन का न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया गया है।
सरकार को होगा राजस्व लाभ
सर्किल रेट और स्टांप शुल्क बढ़ने से राज्य सरकार के राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। वहीं जमीन खरीदने वालों को अब पहले की तुलना में अधिक राशि रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क के रूप में खर्च करनी पड़ेगी।
नई व्यवस्था से जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य के बीच का अंतर कम होगा, लेकिन आम खरीदारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा।
सरकारी फैसले की प्रमुख बातें
फ्रेजर रोड में सर्किल रेट 1 करोड़ से बढ़कर 2 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा हुआ।बोरिंग रोड में 40 लाख से बढ़कर 80 लाख रुपये प्रति कट्ठा।पटना के कई शहरी इलाकों में जमीन की कीमत दोगुनी।
ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का न्यूनतम मूल्य 1.6 गुना बढ़ा।स्टांप शुल्क 6% से बढ़ाकर 7% किया गया।हर वित्तीय वर्ष में एमवीआर में स्वतः 5% वृद्धि होगी। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू होंगी.





