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जुड़वां बेटियों के जन्म पर बहू की हत्या, पति और ससुर को उम्रकैद

बिहार के पश्चिम चंपारण के बगहा में जुड़वां बेटियों को जन्म देने पर पति और ससुर ने बहू की हत्या कर दी। व्यवहार न्यायालय ने कुरीतिपूर्ण सोच को घोर अपराध मानते हुए दोनों दोषियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।

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कोर्ट ने सुनाई सजा
© social media
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

DESK: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा स्थित नगर थाना क्षेत्र के बनकटवा सुनारपट्टी मोहल्ले में कुरीतिपूर्ण और अमानवीय सोच से जुड़ा एक जघन्य मामला सामने आया है। जुड़वां बच्चियों को जन्म देने पर बहू की हत्या के आरोप में व्यवहार न्यायालय ने पति और ससुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस बात की जानकारी प्रभारी अपर लोक अभियोजक प्रभु प्रसाद ने दी।


यह फैसला व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि रंजन ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने की स्थिति में उन्हें छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। 


अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतका नेहा की शादी घटना से लगभग तीन वर्ष पूर्व बनकटवा सुनारपट्टी मोहल्ले में हुई थी। विवाह के बाद शुरुआती समय सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन जब नेहा ने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया तो पति और ससुर पुत्र न होने से नाराज़ हो गए। पुत्र मोह और संकीर्ण मानसिकता के चलते दोनों ने नेहा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।


जुड़वां बेटियों के जन्म को लेकर घर में लगातार विवाद होता रहा। इसी कुप्रथा और लैंगिक भेदभाव से प्रेरित होकर पति और ससुर ने मिलकर नेहा की हत्या कर दी और मामले को दबाने का प्रयास किया। घटना के बाद मृतका के पिता नंद किशोर सोनी ने नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।


जांच के दौरान पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए, गवाहों के बयान दर्ज किए और आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सशक्त रूप से अपना पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष के तर्कों को न्यायालय ने खारिज कर दिया।