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पहले दुकान में घुसे कर्मचारी, फिर बाहर फेंक दिया सारा सामान और जड़ दिया ताला! बेतिया राज पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप

Bihar News: बेतिया में मां कालीधाम मंदिर के पास छोटी दुकान चलाकर परिवार का खर्च उठाने वाली महिला की दुकान बंद किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बेतिया राज के कर्मचारियों ने सामान बाहर निकालकर दुकान पर ताला लगा दिया, जिसके बाद परिवार...

पहले दुकान में घुसे कर्मचारी, फिर बाहर फेंक दिया सारा सामान और जड़ दिया ताला! बेतिया राज पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: बेतिया के ऐतिहासिक मां कालीधाम मंदिर के गेट के समीप लाइब्रेरी की सीढ़ी के नीचे छोटी-सी दुकान लगाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाली एक गरीब महिला के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. आरोप है कि बेतिया राज के कर्मचारियों ने महिला की दुकान पर कार्रवाई करते हुए उसमें रखा सामान बाहर निकाल दिया और दुकान में ताला जड़ दिया.


महिला का कहना है कि वह लंबे समय से इसी छोटी-सी दुकान के सहारे अपने परिवार का खर्च चला रही थी. दुकान में मंदिर में चढ़ाने के लिए फूल-माला, सिंदूर, टिकली-बिंदी के अलावा बच्चों के छोटे-छोटे खिलौने और अन्य सामान बेचे जाते थे. इसी दुकान से होने वाली आमदनी परिवार के लिए आय का मुख्य साधन थी.


परिजनों का आरोप है कि बेतिया राज के कर्मचारियों ने दुकान में रखे सामान को बाहर निकालकर फेंक दिया और इसके बाद दुकान को बंद कर दिया. कार्रवाई के दौरान महिला और उसके परिजनों ने इसका विरोध किया. इसी दौरान कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर हाथापाई होने की बात भी सामने आई है.


महिला के परिजनों का आरोप है कि किसी विशेष व्यक्ति के प्रभाव में आकर उनकी दुकान के खिलाफ कार्रवाई की गई है. हालांकि, दुकान पर कार्रवाई को लेकर बेतिया राज की ओर से अब तक क्या आदेश जारी किया गया था और किस नियम के तहत दुकान बंद कराई गई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.


आखिर सिर्फ इसी दुकान पर कार्रवाई क्यों?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर दुकान बेतिया राज की जमीन पर अवैध कब्जे या अतिक्रमण के कारण हटाई गई है, तो आसपास संचालित अन्य दुकानों पर भी क्या इसी तरह की कार्रवाई होगी. स्थानीय लोगों का कहना है कि बेतिया राज की जमीन पर बड़ी संख्या में दुकानें संचालित हैं. ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कार्रवाई के लिए सिर्फ एक गरीब महिला की दुकान को ही क्यों चुना गया.


स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि दुकान बंद कराने से पहले महिला को कोई नोटिस दिया गया था या नहीं. यदि नोटिस दिया गया था तो उसमें क्या निर्देश थे और कार्रवाई किस आदेश के आधार पर की गई, इसे भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए.


दुकान बंद होने से परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट

छोटी-सी दुकान से होने वाली आमदनी बंद होने के बाद महिला के परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. महिला का कहना है कि इसी दुकान से होने वाली कमाई से परिवार का खर्च चलता था. अब दुकान पर ताला लग जाने के बाद परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है.


परिजनों का कहना है कि यदि दुकान को किसी नियम के उल्लंघन या अतिक्रमण के कारण हटाया गया है, तो उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए. उनका सवाल है कि वर्षों से दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाली महिला के रोजगार का विकल्प क्या होगा.


मामले को लेकर अब जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है. स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार का कहना है कि जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि दुकान पर कार्रवाई किस आदेश के तहत की गई और क्या पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार अपनाई गई.


साथ ही यह भी जांच का विषय है कि यदि बेतिया राज की जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, तो क्या सभी दुकानदारों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जाएगी.


फिलहाल गरीब महिला की दुकान पर लगे ताले के बाद परिवार के सामने रोजगार का संकट खड़ा है. वहीं कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर नियमों की समानता, पारदर्शिता और बेतिया राज के कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं.