Bihar News : बिहार की सियासत में छोटे सरकार के नाम से चर्चित अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को लेकर एक नया सवाल खड़ा हो गया है। कभी तेजस्वी यादव की पार्टी से अलग होकर नीतीश कुमार की सरकार को बहुमत दिलाने में मदद करने वाली नीलम देवी पर खुद जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने कार्रवाई की हैं। दिलचस्प बात यह है कि अनंत सिंह के दोबारा विधायक बनने के बाद से नीलम देवी सक्रिय राजनीति से लगभग दूर ही नजर आ रही थीं। न वह चुनावी सभाओं में दिखाई दे रही थीं और न ही विधान परिषद चुनाव को लेकर अनंत सिंह की तरह खुलकर राजनीतिक बयानबाजी कर रही थीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नीलम देवी खुद को राजनीति से दूर रख रही थीं, तो फिर उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप कैसे लगा और उन्हें निष्कासन की कार्रवाई का सामना क्यों करना पड़ा?
नीलम देवी का राजनीतिक सफर मोकामा से शुरू होकर बिहार की सत्ता के गलियारों तक पहुंचा था। वर्ष 2022 में अनंत सिंह की विधायकी समाप्त होने के बाद मोकामा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में नीलम देवी ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर जीत हासिल की और विधानसभा पहुंचीं। उस वक्त उन्होंने अपने पति की राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी उठाई थी। लेकिन इसके बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं। अनंत सिंह को एके-47 मामले में राहत मिली और उनकी राजनीतिक वापसी का रास्ता साफ हुआ। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में वह फिर मैदान में उतरे और मोकामा से जीत हासिल कर विधायक बन गए।
अनंत सिंह की वापसी के बाद मोकामा की राजनीति में एक बार फिर छोटे सरकार का दबदबा चर्चा में आ गया। वहीं, नीलम देवी की सक्रियता पहले जैसी नहीं रही। अनंत सिंह ने भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले के बाद उन्होंने संकेत दिया कि उनका यह आखिरी चुनाव है और आगे उनके बेटे राजनीति में उतरेंगे। अपनी पत्नी की राजनीतिक भूमिका पर बात करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि नीलम देवी को राजनीति नहीं आती, वह गृहिणी हैं और परिवार संभालेंगी।
अनंत सिंह के इस बयान से यह संकेत मिला कि परिवार की अगली राजनीतिक पारी में उनके बेटे को आगे बढ़ाने की तैयारी है, जबकि नीलम देवी की भूमिका घर-परिवार तक सीमित रह सकती है। ऐसे में जेडीयू की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब नीलम देवी सक्रिय राजनीति से दूर थीं, तब उन्होंने आखिर ऐसा क्या किया, जिसे पार्टी ने अनुशासनहीनता या दलविरोधी गतिविधि माना?
नीलम देवी की राजनीतिक भूमिका का एक अहम अध्याय फरवरी 2024 में लिखा गया था। उस समय नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग होकर एनडीए में लौटे थे और विधानसभा में बहुमत परीक्षण का सामना कर रहे थे। उस दौरान आरजेडी के तीन विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया था। इनमें नीलम देवी भी शामिल थीं। उन्होंने नीतीश सरकार के पक्ष में मतदान किया था, जिससे सरकार को बहुमत साबित करने में मदद मिली। उस वक्त उनके फैसले को तेजस्वी यादव के लिए राजनीतिक झटका और नीतीश कुमार के लिए राहत के तौर पर देखा गया था।
अनंत सिंह भी यह कहते रहे हैं कि जब नीतीश कुमार की सरकार पर संकट आया था, तब उन्होंने अपनी पत्नी से सरकार के समर्थन में खड़े होने को कहा था। यानी नीलम देवी का वह फैसला अनंत सिंह के मुताबिक, उनके कहने पर लिया गया राजनीतिक कदम भी था। अब वही नीलम देवी जेडीयू की कार्रवाई के दायरे में हैं। यही वजह है कि इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं।
ताजा विवाद विधान परिषद चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के विरोध से जुड़ा है। अनंत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयान दिए। जेडीयू ने अनंत सिंह और नीलम देवी दोनों को छह साल के लिए निष्कासित करने की कार्रवाई की है। हालांकि, अनंत सिंह की राजनीतिक गतिविधियों और नीलम देवी की भूमिका को अलग-अलग करके देखना जरूरी है। यदि पार्टी के पास नीलम देवी के खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप या प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अनंत सिंह खुलकर नीरज कुमार का विरोध कर रहे थे, तब नीलम देवी कहां थीं? उन्होंने किस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार किया? क्या उन्होंने जेडीयू के खिलाफ कोई बयान दिया या किसी पार्टी विरोधी गतिविधि में हिस्सा लिया? अगर ऐसा हुआ, तो उसका आधार क्या है? और यदि वह वास्तव में राजनीति से दूर थीं, तो उन पर कार्रवाई का ठोस कारण क्या है?
बिहार की राजनीति में किसी भी दल को अपने संगठनात्मक अनुशासन के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन जब एक ऐसे व्यक्ति पर कार्रवाई होती है, जिसकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका ही सवालों के घेरे में हो, तो आरोपों की स्पष्टता भी उतनी ही जरूरी हो जाती है। नीलम देवी ने कभी नीतीश सरकार के बहुमत परीक्षण में समर्थन देकर अहम भूमिका निभाई थी। अब उनके निष्कासन ने एक नया राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह केवल पार्टी अनुशासन का मामला है या अनंत सिंह के साथ बढ़ते टकराव का असर उनकी पत्नी तक भी पहुंचा है? इसका जवाब जेडीयू के आधिकारिक आरोपों और उपलब्ध तथ्यों से ही स्पष्ट हो सकेगा।





