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AI in election: AI की चालबाज़ी से उलझे बिहार के वोटर! फर्जी कॉल्स-Deepfake से फैला भ्रम, अब चुनाव आयोग कसेगा शिकंजा!

AI in election: बिहार के चुनावी मैदान में अब नेता ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी उतर आया है! फर्जी कॉल्स और डीपफेक वीडियो ने वोटरों को कर दिया कंफ्यूज, अब चुनाव आयोग है एक्शन मोड में।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
© Google
Nitish Kumar
Nitish Kumar
2 मिनट

AI in election: 2024 के लोकसभा चुनावों में जिस टूल ने प्रचार की रणनीति को सबसे ज्यादा बदला वह था ,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। बिहार में भी इसका असर खूब दिखा, जहां नेताओं की आवाज़ में लाखों फर्जी कॉल्स, AI से बने भाषण और deepfake वीडियो वायरल हुए।


वहीँ BJP, कांग्रेस, JDU, RJD जैसे दलों ने प्रचार में AI का जमकर इस्तेमाल किया। ‘भाषिणी’ जैसे टूल से भाषणों का रीयल-टाइम अनुवाद हुआ, जबकि AI-वॉयस क्लोनिंग से नेताओं की आवाज़ में देश भर में 5 करोड़ से अधिक रोबोकॉल किए गए। 

चुनाव में AI का प्रचार तंत्र

ग्रामीण क्षेत्रों में रोबोकॉल यानि AI की मदद से  प्री रिकार्डेड आवाज से मतदाताओं को प्रभावित किया गया। कुछ Deepfake वीडियो में नेताओं को ऐसी बातें कहते हुए दिखाया गया जो उन्होंने कभी कही ही नहीं  इससे कई बार वोटर्स के मन में  भ्रम की स्थिति बनी। 

चुनाव आयोग सतर्क

चुनाव आयोग अब इस पर नई गाइडलाइन बनाने में जुट गया है। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बिहार समेत पूरे देश में Deepfake और फर्जी प्रचार सामग्री की बाढ़ आ गई थी। अब इसे रोकने के लिए सख्त नियम लाए जा रहे हैं, जिनकी पहली झलक संभवतः 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगी।

TRAI का एक्शन

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (TRAI) ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे AI आधारित फर्जी कॉल्स और अमान्य टेलिमार्केटर्स की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दें।आपको बता दे कि Deepfake कॉल इतने रियल होते हैं  कि कई बार हम असली-नकली का फर्क आम आदमी नहीं पाता है। AI से चुनाव अब डिजिटल दंगल बन गया है। AI ने प्रचार को सस्ता, तेज़ और ज्यादा असरदार बना दिया है लेकिन यह मतदाता की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह हर खबर और कॉल को सोच-समझकर ही स्वीकार करे।



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