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12 साल बाद बांग्लादेश की जेल से रिहा हुआ दरभंगा का लाल सतीश, परिवार में खुशी की लहर, स्वागत की जोरदार तैयारियां

DARBHANGA: आखिरकार बांग्लादेश की जेल में 12 साल गुजारने के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया गया है. सतीश को भारत-बांग्लादेश के दर्शाना गेडे बॉर्डर से रिहा कर दिया गया है. सतीश की रिहाई से

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DARBHANGA: आखिरकार बांग्लादेश की जेल में 12 साल गुजारने के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया गया है. सतीश को भारत-बांग्लादेश के दर्शाना गेडे बॉर्डर से रिहा कर दिया गया है. सतीश की रिहाई से परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई है और पूरा गांव उसके स्वागत की तैयारियों में लगा है. दर्शना बॉर्डर पर बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश ने सतीश को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को सौंपा. इस दौरान सतीश का छोटा भाई मुकेश भी अपने बड़े भाई की अगुवानी करने सीमा पर मौजूद था. बता दें कि साल 2008 में बीमार सतीश को इलाज के लिए पटना लाया गया था. इस दौरान मानसिक तौर पर विक्षिप्त सतीश अचानक से पटना से गायब हो गया था. परिजनों ने उसे ढूंढने की तमाम कोशिशें की लेकिन उसका पता नहीं चल सका. सतीश के भाई मुकेश ने अपने भाई की बरामदगी को लेकर सीएम नीतीश कुमार से भी मुलाकात की  लेकिन इसका कुछ भी नतीजा नहीं निकला. आखिरकार थक हार कर मुकेश ने इसी साल जुलाई महीने में मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर को पत्र लिखा. दफ्तुआर ने इस मामले में फौरन कार्रवाई करते हुए सतीश की रिहाई को लेकर बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, पीएम नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखा. मानवाधिकार कार्यकर्ता दफ्तुआर की यह पहल रंग लाई और कोशिशों के बाद बांग्लादेश ने उसे जेल से रिहा करने का फैसला किया. दरभंगा से प्रशांत की रिपोर्ट
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