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29-Oct-2025 08:20 AM
By First Bihar
Unlucky Cricketers: भारतीय क्रिकेट के 51 साल के वनडे इतिहास में 251 खिलाड़ी मैदान पर उतर चुके हैं। सचिन तेंदुलकर और अनिल कुंबले जैसे कई दिग्गज खिलाड़ियों ने भारत को इस खेल में महाशक्ति बनाया, लेकिन इस सफर में कुछ गेंदबाजों के साथ अन्याय भी हुआ। दो ऐसे गेंदबाज जिन्होंने अपने आखिरी वनडे में 5 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द मैच बने, लेकिन फिर कभी प्लेइंग-11 में उन्हें जगह नहीं मिली। ये दोनों हैं 2007 टी20 वर्ल्ड कप विजेता इरफान पठान और लेग स्पिनर अमित मिश्रा।
इरफान पठान ने 2004 में मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू किया था। स्विंग और ऑलराउंड क्षमता से उन्होंने 120 मैचों में 173 विकेट लिए और 1,544 रन बनाए। 2012 में श्रीलंका के खिलाफ पल्लेकेले में उनका आखिरी वनडे था। यह मैच भारत 20 रन से जीता और पठान ने 10 ओवर में 61 रन देकर 5 विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द मैच बने, लेकिन इसके बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें दरकिनार कर दिया। फिटनेस, फॉर्म और युवा गेंदबाजों के उदय ने उनकी वापसी रोक दी। पठान ने बाद में कमेंट्री और कोचिंग में हाथ आजमाया, लेकिन वनडे की नीली जर्सी फिर नहीं पहनी।
अमित मिश्रा की कहानी और भी दर्दनाक है। अप्रैल 2003 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ डेब्यू करने वाले इस लेग स्पिनर ने 36 वनडे में 64 विकेट लिए, जिसमें 5 विकेट हॉल भी शामिल है। 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ विशाखापत्तनम में उनका आखिरी मैच था। उन्होंने 6 ओवर में सिर्फ 18 रन देकर 5 विकेट चटकाए और प्लेयर ऑफ द मैच बने। भारत यह सीरीज भी जीता, लेकिन मिश्रा को फिर कभी मौका नहीं मिला। अश्विन और जडेजा की जोड़ी ने स्पिन विभाग पर कब्जा जमा लिया और मिश्रा IPL में चमकते रहे लेकिन अंतरराष्ट्रीय वनडे से दूर हो गए।
ये दोनों उदाहरण भारतीय क्रिकेट की कठोर सच्चाई को उजागर करते हैं कि बेहतरीन प्रदर्शन भी आपके टीम में बने रहने की गारंटी नहीं देता। चयन नीति, फॉर्म, फिटनेस और प्रतिस्पर्धा ने इनकी किस्मत बदल दी। क्या ऐसे खिलाड़ियों को और मौके मिलने चाहिए थे? यह सवाल आज भी क्रिकेट प्रेमियों के मन में गूंजता है। पठान और मिश्रा की तरह कई अन्य प्रतिभाएं भी हैं जो चमककर गायब हो गईं, फैंस का मानना है कि इन पर और भरोसा किया जा सकता था, कम से कम तब तक जब तक ये लोग उम्दा प्रदर्शन जारी रख रहे थे।