Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने सिख समुदाय को लेकर कथित विवादित टिप्पणी के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है।
यह याचिका याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा और अन्य की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दाखिल की गई थी। इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने वाराणसी की अदालत में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी, लेकिन वहां से उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने वाराणसी कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
मामले में 16 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की पीठ ने फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने दलीलें पेश कीं।
दरअसल, यह पूरा मामला राहुल गांधी के 10 सितंबर 2024 को अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है। एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था कि भारत में एक सिख को पगड़ी और कड़ा पहनने तथा गुरुद्वारे में जाने की आजादी मिलेगी या नहीं। राहुल गांधी ने कहा था कि यह चिंता सिर्फ सिख समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के लोगों से जुड़ी है।
राहुल गांधी के इस बयान पर उस समय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। बीजेपी ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी विदेशों में इस तरह के बयान देकर भारत की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने यह भी कहा था कि भारत में सिख समुदाय को पूरी धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है। इस मुद्दे पर बीजेपी ने कांग्रेस को 1984 के सिख दंगों को लेकर भी घेरा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा फैसले से इस मामले में राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत मिली है।