Bihar Politics: पूर्व मंत्री व पश्चिम बंगाल भाजपा प्रभारी मंगल पांडेय ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पावन धरती पर लोकतंत्र की एक नई सुबह हुई है। जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी जी के सशक्त नेतृत्व में नई सरकार का गठन किया है। यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार और हिंसा की राजनीति के अंत तथा राज्य के नव-निर्माण का शंखनाद है। भाजपा सरकार बनते ही तृणमूल कांग्रेस के कई निर्वाचित जनप्रतिनिधि टीएमसी छोड़ रहे हैं। यह पलायन नहीं, यह बंगाल की जनता की भावना का प्रकटीकरण है। जिन जनप्रतिनिधियों ने सालों तक घुटन में काम किया, वे आज खुलकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। 


मंगल पांडेय ने कहा कि 2011 से 2026 तक टीएमसी शासन ने बंगाल को केवल नारों, घोटालों और भय के माहौल में जकड़ कर रखा था। शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला घोटाला, पशु तस्करी, नगरपालिका भर्ती घोटाला और ‘कट-मनी’ संस्कृति ने युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय कर दिया था। पंचायत चुनावों में लोकतंत्र की हत्या और राजनीतिक विरोधियों की टारगेट किलिंग ने बंगाल के माथे पर कलंक लगाया। 


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने पहले दिन से ही ‘सेवा, सुशासन और विकास’ को अपना मूलमंत्र बनाया है। 48 घंटे के भीतर सभी जिलों में एंटी-सिंडिकेट टास्क फोर्स गठित कर जबरन वसूली पर रोक लगाई गई। राजनीतिक हिंसा में शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी शुरू हुई है। आज बंगाल की माताएं-बहनें खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं।


मंगल पांडेय ने कहा कि सभी भर्ती परीक्षाएं अब पारदर्शी प्रक्रिया और लाइव सीसीटीवी निगरानी में हो रही हैं। पिछली सरकार के घोटालों की जांच तेज कर दी गई है। हल्दिया, ताजपुर पोर्ट, समेत अन्य जगहों की इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में 1.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। 2 साल में 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र की सभी योजनाएं - पीएम किसान, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला बिना कट-मनी के हर लाभार्थी तक पहुंचाई जा रही हैं। 


उन्होंने कहा कि 200 यूनिट तक बिजली फ्री की गई है। दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा और रामनवमी अब सरकारी अवकाश के साथ पूरे सम्मान से मनाई जाएगी। बंगाल की अस्मिता अब वोट-बैंक की राजनीति की भेंट नहीं चढ़ेगी। आज सड़कों पर जो जनाक्रोश दिख रहा है, वह टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी और अन्य नेताओं के खिलाफ जनता का स्वतःस्फूर्त आक्रोश है। वर्षों तक तुष्टिकरण संस्कृति के नाम पर हुए शोषण का हिसाब अब जनता सड़कों पर मांग रही है।