Bihar Politics: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि शराबबंदी कानून को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सहयोगी दलों के साथ साथ जेडीयू विधायक अनंत सिंह इसे खत्म करने की लगातार मांग कर रहे हैं। मांझी, कुशवाहा और अनंत सिंह की मांग पर जेडीयू का दो टूक जवाब आया है।
दरअसल, बिहार में नई सरकार के गठन के बाद यह कयास लगाया जा रहा था कि राज्य में जल्द ही शराबबंदी कानून की समीक्षा की जाएगी और उसे खत्म किया जा सकता है। एनडीए के सहयोगी दल, चाहे वह हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा हो या उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा या चिराग पासवान की पार्टी लोजपा(रामविलास), सरकार से शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
इस बीच जेडीयू नेताओं की तरफ से भी इस कानून को खत्म करने की मांग उठ रही है। मोकामा को बाहुबली विधायक अनंत सिंह लगातार शराबबंदी कानून को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि शराबबंदी कानून से बिहार को नुकसान हो रहा है और छोटे-छोटे बच्चे सूखे नशा की चपेट में आ रहे हैं। अनंत सिंह का कहना है कि शराबबंदी ठीक नहीं है और इसे खत्म कर देना चाहिए।
हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी कई बार शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग कर चुके हैं और उनका दावा है कि इस कानून की आड़ में गरीबों को फंसाया जा रहा है। वहीं आरएमएल विधायक माधव आनंद भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर शराबबंदी की समीक्षा कर उसे खत्म करने की मांग कर चुके हैं हालांकि नई सरकार में मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बिहार नीतीश कुमार के मॉडल पर ही चलेगा और शराबबंदी किसी हाल में खत्म नहीं होगी।
NDA नेताओं द्वारा शराबबंदी खत्म करने की मांग पर जेडीयू का दो टूक जवाब आया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार से बड़ा नेता हम नहीं है, जब यही दोनों और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कह दिया है कि इसपर कोई समझौता नहीं होगा।
नीरज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शराबबंदी को साहसिक फैसला बताया है। नीतीश कुमार ने शराबबंदी को जीवन का लक्ष्य ही तय कर लिया, इसीलिए नीतीश कुमार समाजसुधारक के रूप में जाने जाते हैं। इसमें छेड़छाड़ हमलोग कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। सीएम सम्राट चौधरी ने भी स्पष्ट कह दिया है कि शराबबंदी की न तो समीक्षा होगी और ना ही समझौता होगा। अब जो लोग असहमत हैं वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी से राय कर लें। समीक्षा करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में है और सलाह तो कोई किसी को भी दे सकता है।
फर्स्ट बिहार के लिए पटना से प्रेम राज की रिपोर्ट..