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07-Oct-2020 07:10 AM
PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर उम्मीदवार उतारे जा रहे हैं। तमाम राजनीतिक दलों की नजर जातीय समीकरण पर है. बिहार में विकास को भले ही ऊपरी तौर पर चुनावी मुद्दा बताया जा रहा हो लेकिन सबको पता है कि बगैर जातीय समीकरण के उम्मीदवारों को जीत दिलाना आसान नहीं होगा। बिहार चुनाव में दो राष्ट्रीय पार्टियों ने सबसे ज्यादा भरोसा सबक उम्मीदवारों पर जताया है। बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर पहले चरण के जिन उम्मीदवारों की सूची जारी की है उनमें 30 सवर्णों को टिकट दिया है।
बीजेपी और कांग्रेस में सवर्णों का बोलबाला
भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने पहले चरण के जिन उम्मीदवारों को अब तक की टिकट दिया है उनमें 30 से 1 कैंडिडेट्स शामिल है. बीजेपी ने पहली सूची में केवल 27 नामों की घोषणा की है. जिनमें से 16 सीट सवर्णों के पाले में गया है. इनमें भूमिहार जाति के 6, राजपूत 7, ब्राह्मण 3 उम्मीदवार शामिल है. बीजेपी की पहली लिस्ट में 3 यादव, 4 अति पिछड़ा समाज, 3 दलित से उम्मीदवार दिया गया है. कांग्रेस ने पहले चरण की 20 सीटों में से 14 टिकट सवर्णों को दिया है. इनमें भूमिहार जाति से 6, राजपूत से पांच ब्राह्मण से दो और एक कायस्थ प्रत्याशी को सिंबल दिया गया है.
जेडीयू और अन्य दलों का समीकरण
जेडीयू और हम की 40 सीटों में 12 दलित अति पिछड़ा समाज से, 4 यादव जाति से, 8 कोइरी से, 5 भूमिहार से, पांच राजपूत से, तीन कुर्मी से, दो और एक अल्पसंख्यक वर्ग से कैंडिडेट बनाए गए हैं. भाकपा माले की तरफ से कुशवाहा समाज के 5 उम्मीदवारों को सिंबल दिया गया है. इसके अलावा भाकपा माले ने यादव जाति से चार मुस्लिम समाज सेटिंग और दो अति पिछड़ा को भी टिकट दिया है. भाकपा ने 6 उम्मीदवारों में 2 सीट पर भूमिहार और दो पर यादव को उम्मीदवार बनाया है. एक सीट ऐसी और एक अति पिछड़ा के पाले में गई है. पहले चरण की 71 विधानसभा सीटों पर 28 अक्टूबर को वोट डाले जाने हैं और जिस इलाके में पहले चरण की वोटिंग है. वहां सवर्णों की संख्या को देखते हुए सभी दलों ने उन पर दांव लगाया है.