बोधगया में जनकल्याण संवाद के दौरान बुजुर्ग के गुस्से को देख बोले विजय सिन्हा, कहा..जब दिल का दर्द निकलता है, तभी बीमारी का पता चलता है जमुई में एक फ्लैट से नाबालिग छात्र-छात्राओं को पुलिस ने पकड़ा, इलाके में मचा हड़कंप बिहार से चोरी हुआ ट्रैक्टर राजस्थान से बरामद, एक आरोपी भी गिरफ्तार गोपालगंज में अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई, करोड़ों की वाइन पर चला बुलडोजर South Bihar Express : साउथ बिहार एक्सप्रेस में सीट को लेकर जमकर हुआ विवाद, कबड्डी खिलाड़ियों पर हमला; चार-पांच जख्मी Bihar police alert : समस्तीपुर कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, डिस्ट्रिक्ट जज के ई-मेल पर आया मैसेज दरभंगा में समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया ऐलान, कहा..सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर नहीं चलेगी गेहूं के खेत में मृत मिला बाघ, इलाके में दहशत, करंट लगने से मौत की आशंका Bihar police alert : बिहार के कई जिलों की अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी, पटना सिविल कोर्ट से दो युवक पिस्तौल के साथ गिरफ्तार JEHANABAD: अतिक्रमण हटाने गई पुलिस टीम पर पथराव, दो जवान घायल
30-Dec-2020 07:45 AM
DESK : केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 34 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान कानून वापसी की मांग पर डटे हुए हैं. किसान और सरकार के बीच में आज एक बार फिर बातचीत होगी. आज यानी बुधवार को केंद्र और आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के बीच ठहरी हुई सातवें दौर की बातचीत होगी.
हालांकि, प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने कहा कि चर्चा केवल तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने पर ही होगी. बता दें कि इससे पहले सरकार और किसान संगठनों के बीच छह दौर की वार्ता हो चुकी है और सभी बेनतीजा ही रहीं. इधर, सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉडर्र और गाजीपुर बॉर्डर पर किसान तंबू तान कर डटे हुए हैं.
कृषि मंत्री तोमर, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश किसानों के साथ वार्ता में केंद्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। तोमर ने सोमवार को कहा था कि उन्हें गतिरोध के जल्द दूर होने की उम्मीद है। केंद्र ने सोमवार को आंदोलन कर रहे 40 किसान संगठनों को सभी प्रासंगिक मुद्दों का तार्किक हल खोजने के लिए 30 दिसंबर को अगले दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया। लेकिन किसान यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को केंद्र को लिखे पत्र में कहा कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने का मुद्दा वार्ता के एजेंडे का हिस्सा होना ही चाहिए।