ब्रेकिंग न्यूज़

Budget 2026: ‘देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा’, बजट 2026 पर बोलीं सीएम ममता बनर्जी Budget 2026: ‘देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा’, बजट 2026 पर बोलीं सीएम ममता बनर्जी Budget 2026: बजट 2026 में ऐसा कौन सा ऐलान हुआ कि शेयर बाजार में मच गया हाहाकार, एक झटके में 8 लाख करोड़ स्वाहा! Budget 2026: बजट 2026 में ऐसा कौन सा ऐलान हुआ कि शेयर बाजार में मच गया हाहाकार, एक झटके में 8 लाख करोड़ स्वाहा! Bihar News : “तोर मजनुआ रंगदार के थाना दिवाना बा...", आर्केस्ट्रा गर्ल्स के साथ पिस्टल लेकर डांस करते हुए वीडियो वायरल, फायरिंग के बाद दशहत बिहार में सेहत से खिलवाड़: ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सामान बेचने वाले बड़े सिंडिकेट का खुलासा, लोगों में हड़कंप केंद्रीय बजट 2026-27 : विकसित भारत के संकल्प को मजबूती देते हुए जन आकांक्षाओं की पूर्ति का ब्लूप्रिंट है यह बजट- नीतीश मिश्रा Road Accident : बिहार में सड़क हादसों पर लगेगा ब्रेक, ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए सरकार ने तैयार किया एक्शन प्लान बिहार के वकील ने जिंदा दारोगा का गयाजी में क्यों किया पिंडदान? जानिए.. झूठ-फरेब और ‘भिष्म प्रतिज्ञा’ की दिलचस्प कहानी बिहार में साइबर क्राइम के दो बड़े मामले: शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 27 लाख की ठगी, तो बिजली विभाग का अधिकारी बनकर 4 लाख वसूले

‘वार्ड-पंचायत स्तर पर जातीय सर्वे के विस्तृत आंकड़े जारी करे नीतीश सरकार’ सुशील मोदी की मांग

‘वार्ड-पंचायत स्तर पर जातीय सर्वे के विस्तृत आंकड़े जारी करे नीतीश सरकार’ सुशील मोदी की मांग

03-Jan-2024 07:27 PM

By First Bihar

PATNA: बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बिहार सरकार को पंचायत और वार्ड के अनुसार जातीय सर्वे के विस्तृत आंकड़े शीघ्र जारी करने चाहिए। 


सुशील मोदी मोदी ने कहा है कि भाजपा के सरकार में रहते जातीय सर्वे कराने का निर्णय हुआ था और सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद पार्टी ने पंचायत और वार्ड के आधार पर आंकड़े जारी करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश हमारी मांग के अनुकूल है। राज्य सरकार ने जातीय सर्वे के सिर्फ राज्य स्तरीय आंकड़े जारी कर कई तथ्यों को छिपाने की कोशिश की। अधिकतर जातियों ने अपनी आबादी कम दर्ज करने की शिकायत की। कुछ जातियों की गणना न करने के भी आरोप लगे।


उन्होंने कहा कि पंचायत और वार्ड स्तर पर जातीय आंकड़े जारी होने से तथ्यों को भौतिक रूप से जांच कर संतुष्ट होना या उन्हें विधिवत चुनौती देना आसान होगा। सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सहित 17 बिंदुओं पर सर्वे कराये गए थे,जबकि सरकार ने केवल 7-8 बिंदुओं पर रिपोर्ट जारी की।


सुशील मोदी ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट से पता नहीं चलता कि कितनी जातियां भूमिहीन हैं और किसके पास कितनी जमीन है? जो लोग जातीय सर्वे कराने का श्रेय लूटने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर विस्तृत रिपोर्ट जारी करानी चाहिए ताकि सभी जातियों का संदेह दूर हो।