DESK: खबर सत्ता के गलियारे से निकलकर सामने आ रही है. वजीर साहब के पीए ने बड़ा खेल कर दिया. खेल को बड़े साहब के दफ्तर ने धर लिया. बस क्या था...उधऱ से फऱमान आ गया, वसूलीबाज निजी सहायक को हटाओ. फऱमान मिलते ही मंत्री जी ने आनन-फानन में अपने पीए को हटाने का चिट्ठी भेज दिया.
वैसे तो यह खबर, हस्तिनापुर से जुड़ी हुई है, पर वजीर साहब और पीए दोनों बिहार से ही जुड़े हैं. जैसे ही मंत्री के पीए का खेल पकड़ा गया, इसकी खबर तुरंत वजीर साहब के इलाके में पहुंच गई। कानों कान यह सूचना बाहर भी आ गई है. जानकारी के अनुसार, मंत्री जी ने अपनी ही जाति के एक शख्स @@@@ तिवारी को अपना निजी सचिव बनाकर रखा था. वो शख्स माननीय के इलाके (नेपाल बॉर्डर से सटा क्षेत्र) से ताल्लुक रखता है, बताया जाता है कि वो काफी समय से साथ में काम कर रहा था.
खबर है कि, मंत्रीजी का स्वजातीय पीए बड़े खेल में धरा गया. वजीर साहब के बॉस के कार्यालय की नजर पहले से थी ही, इसी बीच किसी डील में सबूत हाथ लग गया. बस क्या था, खेल का खुलासा हो गया. जानकार बताते हैं कि, बॉस के कार्यालय से माननीय के पास सख्त निर्देश आया, अपने पीए को तुरंत हटाओ. फरमान सुनते ही,वजीर साहब ने क्षण भर की देर नही की, तुरंत चिट्ठी लिखा और अपने पीए को हटाने की सिफारिश कर दी. पीए को हटाने वाला पत्र भी संबंधित कार्यालय में पहुंच गया है. इस तरह से जिस पीए के जरिए मंत्री जी का कामकाज संभल रहा था, अब उसी को अपने हाथों ही हटाना पड़ा है.
बता दें, मंत्रीजी बड़ी पार्टी से ताल्लुक रखते हैं. वर्तमान में ऊपरी सदन के सदस्य हैं. पूर्व में चुनाव जीतकर निचले सदन के भी सदस्य रह चुके हैं. हालांकि बाद में सहयोगी दल से समझौते की वजह से उन्हें जीती हुई सीट छोड़नी पड़ी थी.हालांकि पार्टी ने इन्हें ऊपरी सदन भेजकर सम्मान देने का काम किया था.
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने मंत्री जी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। जिस पीए पर भरोसा करके उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी, उसी के कारण अब राजनीतिक स्तर पर सफाई देने की नौबत आ गई है। अब देखना होगा कि पीए को हटाने के लिए भेजे गए पत्र के बाद मामला यहीं ठहरता है या इसका खामियाजा माननीय को भी उठाना पड़ता है.